सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 200, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहुआ घड़े में पहुंचता है. (२) आ नः सोमं संयतं पिप्युषीमिषमिन्दो पवस्व पवमान ऊर्मिणा. या नो दोहते त्रिरहन्नसश्चुषी क्षुमद्वाजवन्मधुमत्सुवीर्यम्.. (३) हे सोम! आप पवित्र हैं और लहरों से लहराते हुए प्रवाहित होइए. सोमरस का तीनों संध्याओं (सवनों) में प्रयोग में किया जाता है. वह अन्नमय व श्रेष्ठ वीर्य वाला है. (३) न किष्टं कर्मणा नशद्यश्चकार सदावृधम्. इन्द्रं न यज्ञैर्विश्वगूर्तमृष्वसमधृष्टं धृष्णुमोजसा.. (४) हे इंद्र! आप सदैव बढ़ोतरी करने वाले, शत्रुओं को हराने वाले व अपराजित हैं. जो यजमान आप की उपासना करते हैं, उन के कर्मों को कोई नष्ट नहीं कर सकता. (४) अषाढमुग्रं पृतनासु सासहिं यस्मिन्महीरुुरुज्जयः. सं धेनवो जायमाने अनोनवुर्द्यावः क्षामीरनोनवुः.. (५) जब इंद्र प्रकट होते हैं तो वेगवती गौएं उन्हें नमस्कार करती हैं. स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक झुक कर उन का अभिवादन करते हैं. हम भी उन की अभ्यर्थना करते हैं. (५) पांचवां खंड सखाय आ नि षीदत पुनानाय प्रगायत. शिशुं न यज्ञैः परि भूषत श्रिये.. (१) हे यजमान मित्रो! आप आइए, बैठिए और सोम के लिए प्रार्थनाएं गाइए. आप शिशु को सजाने की भांति यज्ञ सजाइए. (१) समी वत्सं न मातृभिः सृजता गयसाधनम्. देवाव्यं ३ मदमभि द्विशवसम्.. (२) हे यजमानो! सोमरस यज्ञ का प्रमुख साधन व मददायी है. दोनों ही तरह अर्थात् दिव्यता और भौतिकता दोनों दृष्टिकोणों से वह शक्तिदायी है. आप सोमरस को वैसे ही जल में मिलाइए, जैसे माता के साथ बच्चे घुलमिल जाते हैं. (२) पुनाता दक्षसाधनं यथा शर्धाय वीतये. यथा मित्राय वरुणाय शन्तमम्.. (३) हे यजमानो! आप मित्र व वरुण के निमित्त सोम को परिष्कृत करें. आप बल व कुशलता की प्राप्ति और देवताओं को भेंट करने के लिए सोमरस को परिष्कृत कीजिए. (३) प्र वाज्यक्षाः सहस्रधारस्तिरः पवित्रं वि वारमव्यम्.. (४) हे सोम! आप अत्यंत बलशाली हैं, हजारों धारों वाले और पवित्र हैं. आप का रस भेड़ के बालों से बनी छलनी में छनता है. (४) स वाज्यक्षाः सहस्रेता अद्भिर्मृजानो गोभिः श्रीणानः.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*