सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 201, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे सोम! आप अत्यंत बलशाली हैं. आप हजारों गुना बलशाली हैं. आप जल से ओतप्रोत हैं. भेड़ के बालों से बनी छलनी से छनते हुए आप द्रोणकलश में जाते हैं. (५) प्र सोम याहीन्द्रस्य कुक्षा नृभिर्येमानो अद्रिभिः सुतः.. (६) पत्थरों से कूट कर निकाले हुए सोमरस को यजमानों ने स्तुतियों से परिष्कृत कर दिया है. वह सोमरस इंद्र के पेट में पहुंचने की कृपा करे. (६) ये सोमासः परावति ये अर्वावति सुन्विरे. ये वादः शर्यणावति.. (७) हे सोम! आप शर्यणावत् (सायण के अनुसार 'शर्यणावत्' कुरुक्षेत्र के शर्यणा नामक मंडल (कमिश्ररी) की एक झील का नाम है.) तालाब के निकट उत्पन्न होते हैं. बाद में आप को परिष्कृत किया जाता है. (७) य आर्जीकेषु कृत्वसु ये मध्ये पस्त्यानाम्. ये वा जनेषु पंचसु.. (८) सोमरस आर्जीक, (हिलेब्रांट के अनुसार कश्मीर में एक स्थान) कमेरों (काम करने वालों) के देश नदी के किनारे व पंचजनों के बीच में पैदा होता है. पैदा होने के बाद उसे परिष्कृत किया जाता है. (८) ते नो वृष्टिं दिवस्परि पवन्तामा सुवीर्यम्. स्वाना देवास इन्दवः.. (९) सोमरस को निचोड़ा और परिष्कृत किया जाता है. वह स्वर्गलोक से श्रेष्ठ वीर्य की वर्षा करता है. सोमरस पोषण प्रदान करता है. (९) छठा खंड आ ते वत्सो मनो यमत्परमाच्चित्सधस्थात्. अग्ने त्वां कामये गिरा.. (१) हे अग्नि! हम वाणी से और वत्स ऋषि मन से आप की उपासना करते हैं. आप उस परम स्थान से भी हमारे पास पधारने की कृपा कीजिए. (१) पुरुत्रा हि सदृङ्ङसि दिशो विश्वा अनु प्रभुः. समत्सु त्वा हवामहे.. (२) हे अग्नि! आप सर्वद्रष्टा, दिशापति और हमारे प्रभु हैं. हम युद्ध में आप का आह्वान करते हैं. (२) समत्स्वग्निमवसे वाजयन्तो हवामहे. वाजेषु चित्रराधसम्.. (३) हे अग्नि! आप क्षमतावान व अद्भुत हैं. हम युद्ध हेतु बल प्राप्ति के लिए आप का आह्वान करते हैं. (३) त्वं न इन्द्रा भर ओजो नृम्ण ॐ शतक्रतो विचर्षणे. आ वीरं पृतनासहम्.. (४) हे इंद्र! आप ओजस्वी, विलक्षण और सैकड़ों कर्म करने वाले हैं. आप पधारिए और हमें ebook converter DEMO Watermarks*