भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 209, कुल 310 में से

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पृष्ठ 209

लिए इंद्र को और ज्यादा बलवान बनाना चाहते हैं. (४) इन्द्रः स दामने कृत ओजिष्ठः स बले हितः. द्युम्नी श्लोकी स सोम्यः.. (५) इंद्र बलिष्ठ, हितकारी व दान (देने) का कार्य करते हैं. वे स्वर्गलोक के वासी हैं. वे श्लोकों (मंत्रों) से स्तुत्य व सोमरस पीने योग्य हैं. (५) गिरा वज्रो न सम्भृतः सबलो अनपच्युतः. ववक्ष उग्रो अस्तृतः.. (६) हे इंद्र! आप के हाथों में वज्र सुशोभित है. वाणी से आप की प्रशंसा की जाती है. आप सबल, उग्र व विस्तृत हैं. आप को कोई नहीं हरा सकता. (६) सातवां खंड अध्वर्यो अद्रिभिः सुत ॐ सोमं पवित्र आ नय. पुनाहीन्द्राय पातवे.. (१) हे पुरोहितो! सोमरस पवित्र है. पाषाणों से कूट कर इस का रस निकाला गया है. उस को छन्ने में छान कर परिष्कृत किया गया है ताकि इंद्र उसे पी सकें. (१) तव त्य इन्दो अन्धसो देवा मधोर्व्याशत. पवमानस्य मरुतः.. (२) हे सोम! आप पवित्र व मधुमय हैं. इंद्र और मरुद्गण आप के इस सोमरस को पीते हैं. (२) दिवः पीयूषमुत्तम ॐ सोममिन्द्राय वज्रिणे. सुनोता मधुमत्तमम्.. (३) हे यजमानो! सोमरस स्वर्गलोक का अमृत और सर्वश्रेष्ठ है. वज्रधारी इंद्र उस का पान करते हैं. अतः उन के लिए उस को परिष्कृत कीजिए. (३) धर्ता दिवः पवते कृत्व्यो रसो दक्षो देवानामनुमाद्यो नृभिः. हरिः सृजानो अत्यो न सत्वभिर्वृथा पाजा ॐ सि कृणुषे नदीष्वा.. (४) सोमरस मधुर और देवताओं का बल बढ़ाने वाला है, यजमान इस की प्रशंसा करते हैं. अंतरिक्ष में शुद्ध होता हुआ यह हरा सोमरस वेगवान घोड़ों की तरह धारा के रूप में अपनी सामर्थ्य प्रकट करता है. (४) शूरो न धत्त आयुधा गभस्त्योः स्व ३ः सिषासन्नथिरो गविष्टिषु. इन्द्रस्य शुष्ममीरयन्नपस्युभिरिन्दुहिंन्वानो अज्यते मनीषिभिः.. (५) सोम हाथों में शस्त्र धारण करते हैं और वीरों की भांति रथारूढ़ हैं. वे गोरक्षक, वीरों व इंद्र के बलवर्द्धक, यजमान के प्रेरक और दिव्य हैं. सोमरस को गोदुग्ध में मिलाया जाता है. (५) इन्द्रस्य सोम पवमान ऊर्मिणा तविष्यमाणो जठरेष्वा विश. ebook converter DEMO Watermarks*