सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 208, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंन त्वा शतं च न हुतो राधो दित्सन्तमा मिनन्. यत्पुनानो मखस्यसे.. (६) हे सोम! आप पवित्र हैं. आप को अपने यज्ञकर्ताओं को धन देने से कोई नहीं रोक सकता, यहां तक कि सैकड़ों शत्रु भी. (६) अया पवस्य धारया यया सूर्यमरोचय:. हिन्वानो मानुषीरप:.. (७) हे सोम! आप अपनी (चमकने वाली) पवित्र धाराओं से सूर्य को चमकाइए. सूर्य मनुष्यों के लिए जल बरसाने वाले हैं. (७) अयुक्त सूर एतशं पवमानो मनावधि. अन्तरिक्षेण यातवे.. (८) हे सोम! आप पवित्र हैं. आप यजमानों की मनोकामना पूरी करने के लिए अंतरिक्ष जैसा विस्तार प्रदान करने की कृपा कीजिए. (८) उत त्या हरितो रथे सूरो अयुक्त यातवे. इन्दुरिन्द्र इति ब्रुवन्.. (९) इंद्र सोम का नाम बोलते हुए अपने रथ में अपने घोड़ों को जुतने का संकेत करते हैं. (९) छठा खंड अग्निं वो देवमग्निभिः सजोषा यजिष्ठं दूतमध्वरे कृणुध्वम्. यो मर्त्येषु निध्रुविर्ऋतावा तपूमूर्धा घृतान्नः पावकः.. (१) हे देवगण! अग्नि सर्वत्र पूज्य हैं. आप यज्ञ में उन को दूत बना कर भेजने की कृपा कीजिए. वे मनुष्यों के मित्र और पवित्र हैं. घृत (घी) उन का अन्न है. वे तेजस्वी हैं. (१) प्रोथदश्वो न यवसे ऽ विष्यन्यदा महः संवरणाद्व्यस्थात्. आदस्य वातो अनु वाति शोचिरध स्म ते व्रजनं कृष्णमस्ति.. (२) घोड़े जैसे घास चर जाते हैं, उसी तरह अग्नि (दावाग्नि) वृक्षों को चट कर जाते हैं. वे हवा के मार्ग का अनुकरण करते हैं. उन का मार्ग पवित्र और काले धुएं वाला है. (२) उद्यस्य ते नवजातस्य वृष्णो ऽ ग्ने चरन्त्यजरा इधानाः. अच्छा द्यामरुषो धूम एषि सं दूतो अग्न ईयसे हि देवान्.. (३) हे अग्नि! आप की शीघ्र उत्पन्न ज्वालाएं वर्षा करने के लिए तैयार हैं. आप अजर, समिधा युक्त व देवताओं के दूत हैं. आप की लपटों का धुआं स्वर्गलोक में देवताओं तक (हवि सहित) पहुंच जाता है. (३) तमिन्द्रं वाजयामसि महे वृत्राय हन्तवे. स वृषा वृषभो भुवत्.. (४) इंद्र शक्तिमान हैं. वे और अधिक शक्तिशाली होने की कृपा करें. हम दुश्मनों के नाश के ebook converter DEMO Watermarks*