सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 207, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंपर बैठा कर परिष्कृत किया जाता है. (२) अव्या वारैः परिप्रिय ॡ हरि ॡ हिन्वन्त्यद्रिभिः. पवमानं मधुश्रुतम्.. (३) हे सोम! आप पवित्र हैं व मधु चुआते हैं. यजमान आप को पत्थर से कूट कर रस निकालते हैं. आप को जल से निमग्न कर देते हैं. आप को भेड़ के बालों से बनी छलनी से छान कर परिष्कृत किया जाता है. (३) आ पवस्व मदिन्तम पवित्रं धारया कवे. अर्कस्य योनिमासदम्.. (४) हे सोम! आप आइए और आप इंद्र को आनंद देने हेतु धाराओं से (पवित्र) छलनी में छनने की कृपा कीजिए. (४) स पवस्व मदिन्तम गोभिरञ्जानो अक्तुभिः. एन्द्रस्य जठरं विश.. (५) हे सोम! आप मददायी व गाय के दूध के साथ मिले हुए हैं. आप पवित्र धारा से छनिए. आप इंद्र के पेट में प्रविष्ट होने की कृपा कीजिए. (५) पांचवां खंड अया वीती परि स्रव यस्त इन्दो मदेष्वा. अवाहन्नवतीर्नव.. (१) हे सोम! आप इंद्र के लिए परिष्कृत होइए. आप इंद्र को आनंद प्रदान कीजिए. आप नएनए कष्टों को दूर करने की कृपा कीजिए. (१) पुरः सद्य इत्थाधिये दिवोदासाय शंबरम्. अध त्यं तुर्वशं यदुम्.. (२) हे सोम! आप का रस पीने के बाद ही इंद्र ने शंबरासुर, तुर्वश और यदु को मारा. इन तीनों का नाश इंद्र ने यज्ञ करने वाले दिवोदास के लिए किया. (२) परि ण्ओ अश्मश्वविद्गमदिन्दो हिरण्यवत्. क्षरा सहस्रिणीरिषः.. (३) हे सोम! आप हमें अश्वों का ज्ञाता बनाइए. आप हमें अश्ववान, गोवान व स्वर्णवान बनाइए. आप सहस्र धाराओं से झरने की कृपा कीजिए. (३) अपघ्नन्पवते मृधो ऽ प सोमो अराव्णः. गच्छन्निन्द्रस्य निष्कृतम्.. (४) सोमरस इंद्र के पवित्र स्थान तक (पवित्र हो कर) पहुंचता है. वह मधुर और जल मिश्रित है. उस के विकारों को दूर कर के उसे स्वच्छ कर दिया गया है. (४) महो नो राय आ भर पवमान जही मृधः. रास्वेन्दो वीरवद्यशः.. (५) हे सोम! आप पवित्र हैं. आप हमें धनवान तथा वीरों की भांति यशस्वी बनाने की कृपा कीजिए. (५) ebook converter DEMO Watermarks*