भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 211, कुल 310 में से

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पृष्ठ 211

कीजिए. (१) पवमान नि तोशसे रयि सोम श्रवाय्यम् इन्दो समुद्रमा विश.. (२) हे सोम! आप पवित्र व संतुष्टिदायक हैं. आप दुष्टों को दंड देने की कृपा कीजिए. हम आप का आह्वान करते हैं. (२) अपघ्नन्पवसे मृधः क्रतुवित्सोम मत्सरः. नुदस्वादेवयुं जनम्.. (३) हे सोम! आप पवित्र हैं. आप यज्ञ की क्रियाविधि जानने वाले हैं. आप ईर्ष्यालुओं और नास्तिकों को दूर करने की कृपा कीजिए. आप का प्रभाव देवताओं जैसा (दिव्य) है. (३) अभी नो वाजसातमं रयिमर्ष शतस्पृहम्. इन्दो सहस्रभरणसं तुविद्यम्नं विभासहम्.. (४) हे सोम! आप तेजस्वी हैं. आप हमें सैकड़ों लोगों द्वारा चाहा गया धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. आप द्वारा दिए गए धन से हम हजारों लोगों का भरणपोषण करने में समर्थ हो सकें. आप हमें तेजस्वी और यशस्वी बनाने की कृपा कीजिए. (४) वयं ते अस्य राधसो वसोर्वसो पुरुस्पृहः. नि नेदिष्ठतमा इषः स्याम सुम्ने ते अध्रिगो.. (५) हे सोम! हम आप का आश्रय चाहते हैं. आप सभी के द्वारा चाहे जाते हैं. आप हमें जो अन्नधन प्रदान करते हैं, उस से हम सुखी बनें. आप सूर्य के साथ वास करने वाले हैं. (५) परि स्य स्वानो अक्षरदिन्दुरव्ये मदच्युतः. धारा य ऊर्ध्वो अध्वरे भ्राजा न याति गव्ययुः.. (६) सोमरस श्रेष्ठ व तेजस्वी है. यज्ञ में उस की धाराओं का प्रयोग किया जाता है. चमकने वाले सोमरस की ऊर्ध्व धारा गतिमान के रूप में यज्ञ में काम आती है. सोमरस को स्वाभाविक रूप से परिशुद्ध किया जाता है. (६) पवस्व सोम महान्त्समुद्रः पिता देवानां विश्वाभि धाम.. (७) हे सोम! आप पवित्र, रसीले व पालक हैं. देवताओं के सभी धामों को अपने दिव्य रस से परिपूर्ण करने की कृपा कीजिए. (७) शुक्रः पवस्व देवेभ्यः सोम दिवे पृथिव्यै शं च प्रजाभ्यः.. (८) हे सोम! आप चमकीले हैं. आप देवताओं के लिए बहिए. सोमरस स्वर्गलोक, पृथ्वीलोक और समस्त प्रजा के लिए सुखकारी होने की कृपा करें. (८) दिवो धर्तासि शुक्रः पीयूषः सत्ये विधर्मन्वाजी पवस्व.. (९) हे सोम! आप बलवान, चमकीले, अमृत के समान व स्वर्गलोक के धर्ता (धारण कर्ता) ebook converter DEMO Watermarks*