सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 212, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहैं. आप सत्य रूपी यज्ञ में प्रवाहित होने की कृपा कीजिए. (९) नौवां खंड प्रेष्ठं वो अतिथ २४ स्तुषे मित्रमिव प्रियम्. अग्ने रथं न वेद्यम्.. (१) हे अग्नि! आप बहुत अधिक प्रिय व हमारे मेहमान हैं. आप हमें मित्र जैसे प्रिय और सर्वज्ञाता हैं. आप हविवाहक हैं. हम आप की स्तुति करते हैं. (१) कविमिव प्रश २४ स्वं यं देवास इति द्विता. नि मर्त्येष्वादधुः.. (२) देवताओं ने कवि की भांति दो रूपों (गार्हपत्य और आहवनीय) में मनुष्यों में अग्नि को प्रतिष्ठित किया. (२) त्वं यविष्ठ दाशुषो नूँः पाहि शृणुही गिरः. रक्षा तोकमुत त्मना.. (३) हे इंद्र! आप हमारी वाणी सुनिए. आप हमें अपनी शरण में लीजिए. आप अपने यजमानों की स्तुति पर ध्यान दीजिए. आप उन की रक्षा के लिए सचेष्ट रहने की कृपा कीजिए. (३) एन्द्र नो गधि प्रिय सत्राजिदगोह्य. गिरिं विश्वतः पृथुः पतिर्दिवः.. (४) हे इंद्र! आप विश्वपालक, पर्वत की भांति विशाल एवं स्वर्गलोक के स्वामी हैं. आप कृपया हमारे यज्ञ (पास) में पधारिए. (४) अभि हि सत्य सोमपा उभे बभूथ रोदसी. इन्द्रासि सुन्वतो वृधः पतिर्दिवः.. (५) हे इंद्र! आप सोमरस पीने वाले व सच का पालन करने वाले हैं. आप आकाश और पृथ्वी दोनों ही लोकों में अपनी सामर्थ्य रखते हैं. आप स्वर्गलोक के पति हैं. आप सोमयज्ञ करने वालों की बढ़ोत्तरी करने वाले हैं. (५) त्व २४ हि शश्वतीनामिन्द्र धर्ता पुरामसि. हन्ता दस्योर्मनोवृधः पतिर्दिवः.. (६) हे इंद्र! आप स्वर्गलोक के पति एवं शाश्वत हैं. आप नगरों को धारण करने वाले, दस्युओं का नाश करने वाले व मनोबल की बढ़ोत्तरी करने वाले हैं. (६) पुरां भिन्दुर्यवा कविरमितौजा अजायत. इन्द्रो विश्वस्य कर्मणो धर्ता वज्री पुरुष्टुतः.. (७) हे इंद्र! आप (शत्रुओं के) नगरों के भेदक, कवि, युवा, वज्र वाले, विश्व के कर्मों के धारक व पराक्रमी हैं. आप की कई जगह प्रशंसा होती है. आप अपने इसी स्वरूप के साथ प्रकट हुए हैं. (७) त्वं वलस्य गोमतो ऽ पावरद्रिवो बिलम्. ebook converter DEMO Watermarks*