सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 215, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंएष देवो रथर्यति पवमानो दिशस्यति. आविष्कृणोति वग्वनुम्.. (७) सोम पवित्र हैं. ये यजमानों की इच्छा पूर्ति के लिए यज्ञ स्थान तक जाना चाहते हैं. ये आवाज करते हुए यज्ञ स्थान में जाने के लिए रथ चाहते हैं. (७) एष देवो विपन्युभिः पवमान ऋतायुभिः. हरिर्वाजाय मृज्यते.. (८) सोम पवित्र हैं. पुरोहित सोम को साफ कर के प्रार्थनाओं से उसी तरह सजाते हैं, जैसे युद्ध में ले जाने के लिए घोड़ों को सजाया जाता है. (८) एष देवो विपा कृतो ऽ ति ह्वरा ꣱ सि धावति. पवमानो अदाभ्यः.. (९) सोम पवित्र हैं और स्वयं किसी से नहीं दबते, पर ये स्वयं शत्रुओं को दबा देते हैं. (९) एष दिवं वि धावति तिरो रजा ꣱ सि धारया. पवमानः कनिक्रदत्.. (१०) सोम पवित्र हैं. वे छन कर धारा का रूप धर कर आवाज करते हुए शत्रुलोक को जीतते हैं. वे यज्ञ के प्रभाव से स्वर्गलोक की ओर दौड़ते हैं. (१०) एष दिवं व्यासत्तिरो रजा ꣱ स्यस्तृतः. पवमानः स्वध्वरः.. (११) सोम पवित्र हैं. वे अपने यज्ञ स्थान से स्वर्गलोक के लिए प्रस्थान करते हैं. वे यज्ञ के श्रेष्ठ साधन हैं और शत्रुओं को हरा सकने की सामर्थ्य रखते हैं. (११) एष प्रत्नेन जन्मना देवो देवेभ्यः सुतः. हरिः पवित्रे अर्षति.. (१२) सोम पवित्र और हरित कांति वाले हैं. देवताओं और उन की पीढ़ियों द्वारा जन्म से ही पवित्रतापूर्वक उपयोग में लाए जाते हैं. (१२) एष उ स्य पुरुव्रतो जज्ञानो जनयन्निषः. धारया पवते सुतः.. (१३) सोम पुष्टतादायी आहार को पैदा करते हैं. वे स्फूर्तिदायी कार्य क्षमता उत्पन्न करने वाले हैं. वे अपनी धाराओं से झरते हुए स्वतः ही स्वच्छ (पवित्र) हो जाते हैं. (१३) दूसरा खंड एष धिया यात्यण्व्या शूरो रथेभिराशुभिः. गच्छन्निन्द्रस्य निष्कृतम्.. (१) सोम शूरवीर हैं. अंगुलियों से इन्हें निचोड़ा जाता है. ये जल्दी चलने वाले रथ से बुद्धिपूर्वक इंद्र के पास जाते हैं. (१) एष पुरू धियायते बृहते देवतातये. यत्रामृतास आशत.. (२) यज्ञ स्थान में बहुत से देवता प्रतिष्ठित हैं. ये उस यज्ञ स्थल में बुद्धिपूर्वक अगणित कार्य करने की इच्छा रखते हैं. (२) ebook converter DEMO Watermarks*