सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 214, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंदसवां अध्याय पहला खंड अक्रान्तसमुद्रः प्रथमे विधर्मन् जनयन्प्रजा भुवनस्य गोपाः. वृषा पवित्र अधि सानो अव्ये बृहत्सोमो वावृधे स्वानो अद्रिः.. (१) सोम पानी बरसाने वाले, सब की रक्षा करने वाले व दिव्य हैं. सब से पहले आकाश में उन्होंने प्रजा को उत्पन्न कर के प्रतिष्ठा प्राप्त की, फिर पृथ्वी के ऊपर प्राकृतिक छलनी से छन कर के बढ़ोतरी प्राप्त की. (१) मत्सि वायुमिष्टये राधसे नो मत्सि मित्रावरुणा पूयमानः. मत्सि शर्धो मारुतं मत्सि देवान्मत्सि द्यावापृथिवी देव सोम.. (२) छाना गया सोमरस मित्र, वरुण तथा मरुद्गण की सामर्थ्य बढ़ा देने वाला हो. वह इंद्र के भी बल को बढ़ाए. वह हमें अन्न, धन दिलाने के लिए वायु को प्रसन्न करे. सोमरस अनुपम (दिव्य) है. वह स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक दोनों ही लोकों के लिए प्रसन्नता बढ़ाने वाला हो. (२) महत्तत्सोमो महिषश्चकारापां यद्गर्भो ऽ वृणीत देवान्. अदधादिन्द्रे पवमान ओजो ऽ जनयत्सूर्ये ज्योतिरिन्दुः.. (३) सोम ने सूर्य में प्रकाश उत्पन्न किया. इंद्र में ओज स्थापित किया. ये जल के गर्भ स्वरूप और महानतम हैं. सोम ने बहुत से कार्य किए हैं. (३) एष देवो अमर्त्यः पर्णवीरिव दीयते. अभि द्रोणान्यासदम्.. (४) सोम अमर हैं. ये पक्षी के उड़ने की तरह वेग से द्रोणकलश में प्रवेश करते हैं. (४) एष विप्रैरभिष्टुतो ऽ पो देवो वि गाहते. दधद्रत्नानि दाशुषे.. (५) सोम दिव्य और ब्राह्मणों द्वारा प्रशंसित हैं. ये जल में मिलते हैं. सोम यजमानों के लिए धन धारण करते हैं. (५) एष विश्वानि वार्या शूरो यन्निव सत्वभिः. पवमानः सिषासति.. (६) शूरवीर जैसे बल प्रयोग करता है, वैसे ही सोम अपना धन देते हैं. ये बलशाली, सामर्थ्यवान और ऐश्वर्यशाली हैं. (६) ebook converter DEMO Watermarks*