भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 219, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 219

छलनी से छान कर तैयार किया गया है. (१) स पवित्रे विचक्षणो हरिरर्षति धर्णसिः. अभि योनिं कनिक्रदत्.. (२) सोमरस पवित्र, विलक्षण, हरा व सब को धारण करने वाला है. वह छलनी से छनते समय आवाज करता है. (२) स वाजी रोचनं दिवः पवमानो वि धावति. रक्षोहा वारमव्ययम्.. (३) सोमरस शक्तिमान है. स्वर्गलोक को चमकाता है और दुष्टों का नाश करता है. वह दिव्य है और छनता हुआ लगातार प्रवाहित होता रहता है. (३) स त्रितस्याधि सानवि पवमानो अरोचयत्. जामिभिः सूर्य २ सह.. (४) सोम अपने तेज से सूर्य के साथ प्रकाशित होते हैं. त्रितयज्ञ (प्रकृति, प्राणी और आकाश के बीच आदानप्रदान पूर्ण यज्ञ) में विधिविधान से सुशोभित होते हैं. (४) स वृत्रहा वृषा सुतो वरिवोविद्ददाभ्यः. सोमो वाजमिवासरत्.. (५) सोम शत्रुनाशक, शक्तिवर्द्धक व धनदाता हैं. निचोड़ कर निकाले जाते समय ये घोड़े के समान वेगवान हो कर घड़े में प्रवेश करते हैं. (५) स देवः कविनेषितो ३ ऽ भि द्रोणानि धावति. इन्दुरिन्द्राय म २ हयन्.. (६) सोम इंद्र और अन्य देवों का महत्त्व बढ़ाते हैं. सोमयज्ञ करने वाले यजमान उन्हें वेग से कलश में प्रवाहित करते हैं और स्वर्गलोक में प्रकाशित होते हैं. (६) सातवां खंड यः पावमानीरध्येत्यूषिभिः संभृत २४ रसम्. सर्व २४ स पूतमश्नाति स्वदितं मातरिश्वना.. (१) जो यजमान ऋषियों द्वारा संकलित जीवन की उपयोगी बातों में ध्यान लगाता है, पवित्रकारी सूक्तों (मंत्रों, स्तुतियों) का पाठ करता है वह यजमान पवित्र और पोषक अन्नादि रसों का आनंद लेता है. (१) पावमानीयो अध्येत्यृषिभिः संभृत २४ रसम्. तस्मै सरस्वती दुहे क्षीर २४ सर्पिर्मधूदकम्.. (२) ऋषियों ने वेद मंत्रों की रचना की है. जो यजमान उन का अध्ययनमनन करता है, उस का ज्ञान बढ़ाने के लिए सरस्वती सहायता करती हैं. उस यजमान के लिए शहद, दूध, घी आदि पोषक स्वयं प्रदान करती हैं. (२) पावमानीः स्वस्त्ययनीः सुदुघा हि घृतश्रुतः. ebook converter DEMO Watermarks*