भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 247, कुल 310 में से

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पृष्ठ 247

हे देवताओ! सोमरस चमकीला और दूधिया है. आप आकाश और पृथ्वी पर उस सोमरस को मिलाइए. वह दूधियापन सोमरस को अपने में मिला लेता है. (१) ते जानत स्वमोक्यं ३ सं वत्सासो न मातृभिः मिथो नसन्त जामिभिः.. (२) भीड़ में भी जैसे बछड़े अपनी मां गायों के पास चले जाते हैं, वैसे ही सोम आश्रयदाताओं के पास चले जाते हैं. गाएं जैसे अपने बाड़ों को जानती हैं, वैसे ही ये अपने जाने योग्य स्थान को जानते हैं. (२) उप स्रक्वेषु बप्सतः कृण्वते धरुणं दिवि. इन्द्रे अग्ना नमः स्वः.. (३) इंद्र और अग्नि अपनी ज्वाला से हवि को स्वर्गलोक तक पहुंचा देते हैं. उस के बाद सभी इंद्र और अग्नि को पोषक बनाते हैं. (३) तदिदास भुवनेषु ज्येष्ठं यतो जज्ञ उग्रस्त्वेष्णृम्णः. सद्यो जज्ञानो नि रिणाति शत्रूननु यं विश्वे मदन्त्यूमाः.. (४) सभी भुवनों में वे ब्रह्म सब से बड़े कहलाए, सर्वत्र उन की दीप्ति व्याप्त हुई. उन के बल से सूर्य प्रकट हुए, जिन के प्रकट होने से शत्रु समाप्त हो जाते हैं. सभी प्राणी उन्हें देखते ही खुश हो जाते हैं. (४) वावृधानः शवसा भूर्योजाः शत्रुदौसाय भियसं दधाति. अव्यनच्च व्यनच्च सस्नि सं ते नवन्त प्रभृता मदेषु.. (५) हे इंद्र! आप ने अपनी क्षमता से बढ़ोतरी पाई. आप शक्तिमान, दुष्टों के दुश्मन हैं और उन्हें व्यय देते हैं. आप चराचर के संचालक हैं. हम उन्हें (इंद्र) एक साथ नमन एवं उन की उपासना करते हैं. हम उन्हें प्रसन्नता देते हैं और स्वयं भी प्रसन्न होते हैं. (५) त्वे क्रतुमपि वृञ्जन्ति विश्वे द्विय॑देते त्रिर्भवन्त्यूमाः. स्वादोः स्वादीयः स्वादुना सृजा समदः सु मधु मधुनाभि योधीः.. (६) यजमान इंद्र के लिए यज्ञ करते हैं. हम जब दो और दो से तीन होते हैं तो हमारी प्रिय संतानों को आप प्रिय ऐश्वर्य प्रदान करने व उन के बाद आने वाली पीढ़ी को भी मधुरता से युक्त करने की कृपा कीजिए. (६) त्रिकद्रुकेषु महिषो यवाशिरं तुविशुष्मस्तृम्पत् सोममपिबद्विष्णुना सुतं यथावशम्. स ईं ममाद महि कर्म कर्तवे महामुरु २४ सैन २४ सश्चद्देवो देव २४ सत्य इन्दुः सत्यमिन्द्रम्.. (७) सोम सर्वव्यापक प्रकाशमान इंद्र को आनंद देते हैं, जिस से वे और भी अधिक महान काम कर सकें. वे सत्यवान और देव स्वरूप हैं. तीन सुक (पात्र) में निकाले गए जौ के साथ मिले हुए सोमरस को इंद्र विष्णु के साथ पीते हैं. (७) ebook converter DEMO Watermarks*

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