सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 246, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंजाता है, वैसे ही आप हमें धन दीजिए. आप हमें धन देते हैं. (२) शुष्मी शर्धो न मारुतं पवस्वानभिशस्ता दिव्या यथा विट्. आपो न मक्षू सुमतिर्भवा नः सहस्राप्साः पृतनाषाण् यज्ञः.. (३) हे सोम! आप पवित्र हैं. आप हमें मरुद्गणों जैसा बल प्राप्त कराइए. आप यज्ञवत पवित्र और अनेक प्रकार से सुशोभित होते हैं. आप शत्रुओं को जीतने वाले और जल जैसे पवित्र हैं. हमें वैसी ही पवित्र बुद्धि दीजिए. जैसे पवित्र प्रजा ईर्ष्या, द्वेष से दूर रहती है, वैसे ही हम भी दुष्प्रवृत्तियों से दूर रहें. (३) त्वमग्ने यज्ञाना ॐ होता विश्वेष ॐ हितः. देवेभिर्मानुषे जने.. (४) हे अग्नि! आप को देवताओं ने मनुष्य के कल्याण हेतु नियुक्त किया है. आप यज्ञों के होता (पुरोहित) हैं. (४) स नो मन्द्राभिरध्वरे जिह्वाभिर्यजा महः. आ देवान्वक्षि यक्षि च.. (५) हे अग्नि! आप हमारे यज्ञ में अपनी जिह्वाओं (लपटों) से देवताओं का यजन कीजिए. आप देवताओं को आमंत्रित कीजिए और देवताओं तक तृप्तिकारी हवि पहुंचाने की कृपा कीजिए. (५) वेत्था हि वेधो अध्वनः पथश्च देवाञ्जसा. अग्ने यज्ञेषु सुक्रतो.. (६) हे अग्नि! आप यज्ञों में पथप्रदर्शक हैं. आप दूर या पास सभी पथों को जानते हैं. आप सर्वज्ञाता हैं. (६) होता देवो अमर्त्यः पुरस्तादेति मायया. विदथानि प्रचोदयन्.. (७) हे अग्नि! आप अमर व होता हैं. आप माया से सम्मुख प्रकट होते हैं. आप प्रेरक हैं. (७) वाजी वाजेषु धीयते ऽ ध्वरेषु प्र णीयते. विप्रो यज्ञस्य साधनः.. (८) अग्नि बलवान हैं. युद्धों में शत्रुनाश हेतु उन्हें स्थापित किया जाता है. ब्राह्मण यज्ञ के प्रमुख साधन हैं. उन से यज्ञ फलीभूत होते हैं. (८) धिया चक्रे वरेण्यो भूतानां गर्भमा दधे. दक्षस्य पितरं तना.. (९) अग्नि वरेण्य (सर्वश्रेष्ठ), सर्वव्यापक व विश्वपालक हैं. यज्ञ के लिए अग्नि को दक्ष की पुत्री (वेदी) ने धारण किया. (९) छठा खंड आ सुते सिञ्चत श्रिय ॐ रोदस्योरभिश्रियम्. रसा दधीत वृषभम्.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*