भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 245, कुल 310 में से

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पृष्ठ 245

पुष्टिवर्द्धक अन्न दीजिए. (५) ता नः शक्तं पार्थिवस्य महो रायो दिव्यस्य. महि वां क्षत्रं देवेषु.. (६) हे वरुण! आप हमें अपनी शक्ति दीजिए. आप हमें धरती और आकाश में फैला हुआ समस्त धन और क्षात्र तेज प्रदान करने की कृपा कीजिए. (६) ऋतमृतेन सपन्तेषिरं दक्षमाशाते. अद्रुहा देवौ वर्धेते.. (७) वरुण द्रोह न करने वालों की बढ़ोत्तरी करते हैं. वे सत्य से सत्य के पालक हैं. वे अभीष्ट बलदायी हैं. (७) वृष्टिद्यावा रीत्यापेषस्पती दानुमत्याः. बृहन्तं गर्तमाशाते.. (८) हे मित्र! आप उत्तम स्थान पर विराजित हैं. हम वर्षा के लिए उन की उपासना करते हैं. वे पृथ्वी पर सब कुछ नियम से उपलब्ध कराते हैं, दानशील व अन्न के स्वामी हैं. (८) युञ्जन्ति ब्रध्नमरुषं चरन्तं परि तस्थुषः. रोचन्ते रोचना दिवि.. (९) सूर्य गतिशील दिखाई देते हैं, पर स्थिर हैं. वे अग्निरूप हैं. हम उन की उपासना करते हैं. उन की किरणें समस्त स्वर्गलोक को प्रकाशित कर सुशोभित होती हैं. (९) युञ्जन्त्यस्य काम्या हरी विपक्षसा रथे. शोणा धृष्णू नृवाहसा.. (१०) हे इंद्र! आप मनुष्यों के रक्त और बुद्धि को सन्मार्ग पर ले जाने के लिए अपने मनचाहे लाल और प्रौढ़ घोड़ों को रथ में जोतने की कृपा कीजिए. (१०) केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे. समुषद्भिरजायथाः.. (११) हे सूर्य! आप असुंदर को सुंदर बना देने की सामर्थ्य रखते हैं. आप उषाकाल में उदित होते हैं. (११) पांचवां खंड अय २४ सोम इन्द्र तुभ्य २४ सुन्वे तुभ्यं पवते त्वमस्य पाहि. त्व २४ ह यं चकृषे त्वं ववृष इन्दुं मदाय युज्याय सोमम्.. (१) हे इंद्र! आप के लिए सोमरस तैयार किया जाता है. आप इस को पीजिए. आप ही उस को बरसाते हैं, उपजाते हैं. आप आनंद हेतु इसे ग्रहण कीजिए. आप हमें इस से मिलाइए. हम आप की शरण में हैं. (१) स ई २४ रथो न भूरिषाडयोजि महः पुरूणि सातये वसूनि. आदी विश्वा नहुष्याणि जाता स्वर्षाता वन ऊर्ध्वा नवन्त.. (२) हे इंद्र! आप युद्धों में हमारे शत्रुओं को नष्ट कर देते हैं. रथ में जैसे ज्यादा वजन हो ebook converter DEMO Watermarks*