भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 244, कुल 310 में से

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पृष्ठ 244

मा नो अज्ञाता वृजना दुराध्यो ३ माशिवासो ऽ व क्रमुः. त्वया वयं प्रवतः शश्वतीरपो ऽ ति शूर तरामसि.. (५) हे इंद्र! जिन का आनाजाना अज्ञात हो, जो पापाचारी हों, जो दुर्बुद्धि हों वे हमारा कुछ न बिगाड़ सकें. आप हमारी रक्षा कीजिए. अपने संरक्षण में हमें अनेक विघ्न रूपी प्रवाहों से पार पहुंचाइए. (५) अद्याद्या श्वःश्व इन्द्र त्रास्व परे च नः. विश्वा च नो जरितृन्त्सत्पते अहा दिवा नक्तं च रक्षिषः.. (६) हमें आज भी व कल भी इंद्र संरक्षित करें. वे दिनरात हमारी रक्षा करें. वे विश्वपति और सज्जनों के पालनहार हैं. (६) प्रभङ्गी शूरो मघवा तुवीमघः सम्मिश्लो वीर्याय कम्. उभा ते बाहू वृषणा शतक्रतो नि या वज्रं मिमिक्षतुः.. (७) हे इंद्र! आप क्षमतावान हैं. आप सैकड़ों काम करते हैं. आप की भुजाएं वज्र धारण करती हैं. आप शत्रुनाशक, सर्वव्यापक व ऐश्वर्यशाली हैं. (७) चौथा खंड जनीयन्तो न्वग्रवः पुत्रीयन्तः सुदानवः. सरस्वन्त ᳵ हवामहे.. (१) हे सरस्वती! आप श्रेष्ठ कार्यों में अग्रगण्या हैं. हम अच्छी संतान व दान के आकांक्षी हैं. हम आप को आमंत्रित करते हैं. (१) उत नः प्रिया प्रियासु सप्तस्वसा सुजुष्टा. सरस्वती स्तोम्या भूत्.. (२) हे सरस्वती! आप हमें प्रिय हैं. आप की सात बहनें हैं. आप हमें उन से जोड़िए. हम आप की स्तुति करते हैं. (२) तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि. धियो यो नः प्रचोदयात्.. (३) हम उन सविता देवता का वरेण्य तेज धारण करना चाहते हैं, जो हमारी बुद्धि को श्रेष्ठ पथ की ओर उन्मुख एवं प्रेरित करते हैं. (३) सोमानां स्वरणं कृणुहि ब्रह्मणस्पते. कक्षीवन्तं य औशिजः.. (४) हे ब्रह्मणस्पति! आप ने जैसे उशिज से उत्पन्न पुत्र कक्षीवान को ज्ञानी, यशस्वी बनाया, उसी तरह हम सोमयागियों को भी बनाने की कृपा कीजिए. (४) अग्न आयू ᳵ षि पवस आ सुवोर्जमिषं च नः. आरे बाधस्व दुच्छुनाम्.. (५) हे अग्नि! आप दुष्टों को हम से दूर भगाइए. आप हमें दीर्घायु बनाएं. हमें बल व ebook converter DEMO Watermarks*