भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 243, कुल 310 में से

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पृष्ठ 243

हे इंद्र! आप सूर्य के समान प्रकाशमान हैं. आप धनवान, शक्तिमान, यशस्वी व हितैषी हैं. आप दानशील मनुष्यों के पास पहुंचते हैं. (७) नव यो नवतिं पुरो बिभेद बाह्वोजसा. अहिं च वृत्रहावधीत्.. (८) हे इंद्र! आप अपनी भुजाओं के ओज से दुश्मनों के निन्यानवे ठिकाने नष्ट करने वाले हैं. आप वृत्रासुर के नाशक हैं. आप हमें मनपसंद वैभव प्रदान करने की कृपा कीजिए. (८) स न इन्द्रः शिवः सखाश्वावद्गोमद्यवमत्. उरुधारेव दोहते.. (९) हे इंद्र! आप हमारा कल्याण कीजिए. गाएं हमारी मित्र हैं. वे हमारे लिए जैसे अगणित धाराओं से दूध बरसाती हैं, वैसे ही आप भी हमारे लिए धन बरसाइए. (९) तीसरा खंड विभ्राड् बृहत्पिबतु सोम्यं मध्वायुर्दधद्यज्ञपतावविहुतम्. वातजूतो यो अभिरक्षति त्मना प्रजाः पिपर्ति बहुधा वि राजति.. (१) सूर्य प्रकाशमान हैं. वे प्रजा का पालन करते हैं, यजमान को निरोग बनाते हैं, लंबी आयु देते हैं, हवा बहाते हैं व सब के रक्षक हैं. इंद्र कई रूपों में सुशोभित हो रहे हैं. वे भरपूर सोमपान करें. (१) विभ्राड् बृहत्सुभृतं वाजसातमं धर्मं दिवो धरुणे सत्यमर्पितम्. अमित्रहा वृत्रहा दस्युहन्तमं ज्योतिर्जज्ञे असुरहा सपत्नहा.. (२) सूर्य बहुत प्रकाशमान व अन्न और बलदाता हैं. वे धर्म से स्वर्गलोक को धारण करते हैं, अमित्रों के नाशक हैं, वृत्रहंता हैं. वे शत्रुओं, राक्षसों व दुष्टों के नाशक हैं. वे सर्वत्र अपना प्रकाश फैलाते हैं. (२) इद १४ श्रेष्ठं ज्योतिषां ज्योतिरुत्तमं विश्वजिद्धनजिदुच्यते बृहत्. विश्वभ्राड् भ्राजो महि सूर्यो दृश उरु पप्रथे सह ओजो अच्युतम्.. (३) सूर्य ज्योतिमान और क्षमतावान हैं. वे पूरी पृथ्वी को प्रकाशित करते हैं. वे अच्युत हैं. वे बल के साथ रहते हैं. वे धन जीतने वाले हैं. उन की ज्योति विशाल, ज्योतियों में सर्वश्रेष्ठ एवं विश्व को जीतने वाली है. (३) इन्द्र क्रतुं न आ भर पिता पुत्रेभ्यो यथा. शिक्षा णो अस्मिन्पुरुहूत यामनि जीवा ज्योतिरशीमहि.. (४) हे इंद्र! पिता जैसे पुत्रों का लालनपालन करता है, वैसे ही आप हमारा पोषण कीजिए. आप हमें यज्ञ के श्रेष्ठ फल प्रदान कीजिए. हम जीवों को आप दिव्य ज्योति दीजिए. हम और अनेक लोग सहायता के लिए आप को पुकारते रहते हैं. (४) ebook converter DEMO Watermarks*

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