सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 264, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंकया त्वं न ऊत्याभि प्र मन्दसे वृषन्. कया स्तोतृभ्य आ भर.. (२) हे इंद्र! आप किन साधनों से हमारी रक्षा करते हैं? आप हमें किस प्रकार बहुत प्रसन्नता देते हैं? आप कैसे यजमानों (स्तोताओं) की इच्छापूर्ति करते हैं? (२) इन्द्रमिद्देवतातय इन्द्रं प्रयत्यध्वरे. इन्द्र २४ समीके वनिनो हवामह इन्द्रं धनस्य सातये.. (३) हे इंद्र! हम यज्ञ में व वीर भक्तगण संग्राम में आप को आमंत्रित करते हैं. हम धन हेतु आप का आह्वान करते हैं. (३) इन्द्रो मह्ना रोदसी पप्रथच्छव इन्द्रः सूर्यमरोचयत्. इन्द्रे ह विश्वा भुवनानि येमिरे इन्द्रे स्वानास इन्दवः.. (४) हे इंद्र! आप महान हैं. आप ने स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक का फैलाव किया. आप ने सूर्य को प्रकाश से चमकाया. आप ने सकल भुवनों को शरण दी. हम आप के लिए सोमरस भेंट करते हैं. (४) विश्वकर्मन्हविषा वावृधानः स्वयं यजस्व तन्व ३ २४ स्वा हि ते. मुह्यन्त्वन्ये अभितो जनास इहास्माकं मघवा सूरिरस्तु.. (५) हे इंद्र! आप हवि से बढ़ोतरी पाते हैं. आप सभी कर्म साधते हैं. हम संसार के कल्याण के लिए अपने को न्योछावर करते हैं. यज्ञ से विरोध रखने वाले लोगों का मनोबल टूटे. इंद्र हमारे हो जाएं. बुद्धिजीवी लोग हमारे हो जाएं. (५) अया रुचा हरिण्या पुनानो विश्वा द्वेषा २४ सि तरति सयुग्वभिः सूरो न सयुग्वभिः धारा पृष्ठस्य रोचते पुनानो अरुषो हरिः. विश्वा यद्रूपा परियास्यृक्वभिः सप्तास्येभिर्ऋक्वभिः.. (६) हे सोम! आप का रस रुचिपूर्ण है व हरित आभा वाला है. आप उस से द्वेषियों का वैसे ही संहार करते हैं, जैसे सूर्य अपनी किरणों से अंधेरे का संहार करते हैं. आप का रस प्रकाशमान है. छलनी पर आप की धारा प्रकाशमान है. आगेपीछे सब ओर आप की धारा शोभित होती है. आप अपने सात मुखों से निकलने वाली सात किरणों से कहीं ज्यादा प्रकाशमान व उत्तम हैं. (६) प्राचीमनु प्रदिशं याति चेकितत्स २४ रश्मिभिर्यतते दर्शतो रथो दैव्यो दर्शतो रथः. अग्मन्नुक्थानि पौ २४ स्येन्द्रं जैत्राय हर्षयन्. वज्रश्च यद्भवथो अनपच्युता समत्स्वनपच्युता.. (७) हे सोम! आप पूर्व दिशा में प्रस्थान करते हैं. तब आप का रथ बहुत चमकता है. आप का रथ दिव्य व दर्शनीय है. यजमान मंत्र गागा कर अपनी स्तुतियां आप और इंद्र तक पहुंचाते हैं. यजमान विजय पाने की इच्छा से आप को प्रसन्न करते हैं. वे आप से वज्र प्राप्त ebook converter DEMO Watermarks*