सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 266, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंकबूतरी के पास पहुंचता है. (७) स्तोत्र ॐ राधानां पते गिर्वाहो वीर यस्य ते. विभूतिरस्तु सूनृता.. (८) हे इंद्र! आप धनों के स्वामी व वीर हैं. आप वाणी से स्तुति योग्य, अच्छे ऋत (सत्य) वाले और वैभववान हैं. (८) ऊर्ध्वस्तिष्ठा न ऊतये ऽ स्मिन् वाजे शतक्रतो. समन्येषु ब्रवावहै.. (९) हे इंद्र! आप सैकड़ों कार्य करने वाले हैं. आप हमारे संरक्षण के लिए प्रयास कीजिए. आप उच्च स्थान पर प्रतिष्ठित हैं. हम आप से कुछ अन्य बातों के बारे में भी परामर्श (निवेदन) करते रहें. (९) गाव उप वदावटे मही यज्ञस्य रप्सुदा. उभा कर्णा हिरण्यया.. (१०) हे गौओ! यज्ञ स्थान के पास आप को बुलाया जा रहा है. आप रंभा कर आवाज कीजिए. आप यज्ञ फल देने वाली हैं. आप के दोनों ही कान सोने के हैं. (१०) अभ्यारमिदद्रयो निषिक्तं पुष्करे मधु. अवटस्य विसर्जने.. (११) हम पत्थर से कूट कर निकाला गया, बचा हुआ सोमरस परम वीर इंद्र के विसर्जन पर भेंट करने के लिए द्रोणकलश में स्थापित करते हैं. (११) सिञ्चन्ति नमसावटमुच्चाचक्रं परिज्मानम्. नीचीनबारमक्षितम्.. (१२) हम यजमान उस परम शक्ति को नमस्कार करते हैं, नमनपूर्वक यज्ञ विधान करते हैं. उस परम शक्ति का चक्र ऊपर (लोक) स्थित है, नीचे का द्वार चारों ओर झुका हुआ है. वह द्वार अक्षत है. (१२) चौथा खंड मा भेम मा श्रमिष्मोग्रस्य सख्ये तव. महत्ते वृष्णो अभिचक्ष्यं कृतं पश्येम तुर्वशं यदुम्.. (१) हे इंद्र! हम आप के मित्र हैं, इस कारण हम कभी भी श्रम से थके नहीं, कभी भी किसी से डरे नहीं. आप महान हैं. आप की कृपा सराहनीय है. तुर्वश और यदु दोनों ही प्रसन्न दिखाई देते हैं. (१) सव्यामनु स्फिग्यं वावसे वृषा न दानो अस्य रोषति. मध्वा संपृक्ताः सारघेण धेनवस्तूयमेहि द्रवा पिब.. (२) हे इंद्र! आप क्षमतावान हैं. आप बाएं हाथ से ही (आसानी से) सब को शरण दे देते हैं. अत्यंत क्रूर भी आप का कुछ बिगाड़ नहीं सकते. मीठे दूध वाली गायों के समान सुखदायी ebook converter DEMO Watermarks*