भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 276, कुल 310 में से

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पृष्ठ 276

बोले. (७) स नो महाँ अनिमानो धूमकेतुः पुरुश्चन्द्रः धिये वाजाय हिन्वतु.. (८) हे अग्नि! आप की ध्वजा बहुत ही धूम्रमय (धुएं वाली) है. आप महान व आनंददायी हैं. आप हमें बौद्धिक वैभव प्रदान करने की कृपा कीजिए. (८) स रेवाँ इव विशपतिर्दैव्यः केतुः शृणोतु नः. उक्थैरग्निबृहद्भानुः.. (९) हे अग्नि! आप विश्वपालक, दिव्य, दूरदर्शी व राजा जैसे हैं. आप वाणी से की गई हमारी स्तुति को सुनने की कृपा कीजिए. (९) तद्वो गाय सुते सचा पुरुहूताय सत्वने. शं यद्गवे न शाकिने.. (१०) हे यजमानो! आप इंद्र के लिए एकत्रित हो कर प्रार्थनाएं गाइए. इंद्र को स्तोत्र ऐसे प्रिय लगते हैं, जैसे गायों को घास. (१०) न घा वसुर्नि यमते दानं वाजस्य गोमतः. यत्सीमुपश्रवद्गिरः. (११) हे इंद्र! स्तुति से भरी हुई हमारी वाणियां जब आप के समीप पहुंचती हैं तो आप यजमान को धनवान और गोवान बनाने में नहीं चूकते हैं. (११) कुवित्सस्य प्र हि व्रजं गोमन्तं दस्युहा ग्मत्. शचीभिरप नो वरत्.. (१२) हे इंद्र! चोर व डाकू जो गाएं चुराते हैं, आप उन गायों को अपने अधीन कर लेते हैं. आप उन गायों से हमें गोवान बना देते हैं. (१२) दूसरा खंड इदं विष्णुर्वि चक्रमे त्रेधा नि दधे पदम्. समूढमस्य पा ꣳ सुले.. (१) विष्णु ने अपने पैरों को तीन प्रकार से रखा. उन पैरों की पदधूलि में ही सारा संसार समा गया. (१) त्रीणि पदा वि चक्रमे विष्णुर्गोपा अदाभ्यः. अतो धर्माणि धारयन्.. (२) विष्णु अपने तीन पैरों में धर्म को धारण करते हुए संसार को संचालित करते हैं. वे सर्वत्र व्याप्त हैं. (२) विष्णोः कर्माणि पश्यत यतो व्रतानि पस्पशे. इन्द्रस्य युज्यः सखा.. (३) हे यजमानो! आप विष्णु के कर्मों को देखने की कृपा कीजिए. उन कर्मों के वे प्रेरक और इंद्र के योग्य मित्र हैं. (३) तद्विष्णोः परमं पद ꣳ सदा पश्यन्ति सूरयः. दिवीव चक्षुराततम्.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*