भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 275, कुल 310 में से

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पृष्ठ 275

अठारहवां अध्याय पहला खंड पन्यंपन्यमित्सोतार आ धावत मद्याय. सोमं वीराय शूराय.. (१) हे यजमानो! आप सोमरस तैयार करने में लगे हुए हो. आप शूरवीर इंद्र को सोमरस भेंट कीजिए. सोमरस मददायी है. आप जल्दीजल्दी दौड़ कर वह सोमरस इंद्र को भेंट कीजिए. (१) एह हरी ब्रह्मयुजा शग्मा वक्षतः सखायम्. इन्द्रं गीर्भिर्गिर्वणसम्.. (२) इंद्र के घोड़े वाणी के संकेत से ही रथ में जुत जाते हैं. इंद्र हमारे सखा व वाणी से उपास्य हैं. इंद्र के घोड़े उन्हें ले कर यज्ञ में आने की कृपा करें. (२) पाता वृत्रहा सुतमा घा गमन्नारे अस्मत्. नि यमते शतमूतिः.. (३) हे इंद्र! आप वृत्रासुर हंता व सोमपायी हैं. आप दुश्मनों को दूर भगाने व हमारे यज्ञ में अवश्य पधारने की कृपा कीजिए. (३) आ त्वा विशन्त्विन्दवः समुद्रमिव सिन्धवः. न त्वामिन्द्राति रिच्यते.. (४) हे इंद्र! आप के अतिरिक्त और कोई देव श्रेष्ठ नहीं हैं. आप को सोमरस वैसे ही प्राप्त हो, जैसे समुद्र को नदियां प्राप्त होती हैं. (४) विव्यक्थ महिना वृषन्भक्ष १७ सोमस्य जागृवे. य इन्द्र जठरेषु ते.. (५) हे इंद्र! आप जाग्रत व शक्तिमान हैं. सोम के कारण आप की ख्याति बहुत व्यापक है. आप के जठर (पेट) में पहुंचा हुआ सोम भी प्रशंसा प्राप्त करता है. (५) अरं त इन्द्र कुक्षये सोमो भवतु वृत्रहन्. अरं धामभ्य इन्दवः.. (६) हे इंद्र! आप ने वृत्रासुर का हनन किया. हम ने आप को जो सोमरस भेंट किया, वह आप के लिए भरपूर हो. वह सोमरस अन्य देवताओं के लिए भी भरपूर हो. (६) जराबोध तद्विविड्ढि विशेविशे यज्ञियाय. स्तोम १७ रुद्राय दृशीकम्.. (७) हे अग्नि! आप को प्रार्थनाओं से प्रज्वलित किया जाता है. आप बारबार यजमानों के कल्याण के लिए यज्ञ मंडप में प्रकट होने की कृपा कीजिए. यजमान रुद्र के लिए अच्छे स्तोत्र ebook converter DEMO Watermarks*