भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 278, कुल 310 में से

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पृष्ठ 278

द्रोणकलश में स्थिर किया जाता है. यजमानों की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए सोमरस को सत्पात्र में रखा जाता है. (११) त ऽ४ सखायः पुरूरुचं वयं यूयं च सूरयः. अश्याम वाजगन्ध्य ऽ४ सनेम वाजपस्त्यम्.. (१२) हे यजमानो! तुम सब और हम सब सोमरस को प्राप्त करें. वह सोमरस दूधिया (सफेद), पराक्रमी, स्फूर्तिदायी, सुगंधमय और क्षमताशाली है. (१२) परि त्य ऽ४ हर्यत ऽ४ हरिं बभ्रुं पुनन्ति वारेण. यो देवान् विश्वाँ इत् परि मदेन सह गच्छति.. (१३) सोमरस हरा, भूरा व मनोहर है. वह सभी देवताओं की प्रसन्नता के साथ द्रोणकलश में जाता है. (१३) कस्तमिन्द्र त्वा वसवा मर्त्यो दधर्षति. श्रद्धा इत् ते मघवन पार्ये दिवि वाजी वाजं सिषासति.. (१४) हे इंद्र! किस में इतनी सामर्थ्य है जो आप का तिरस्कार कर दे. आप ऐश्वर्यशाली हैं. आप के भक्त आप के प्रति श्रद्धा के कारण ही दुर्दिन में आप से शक्ति और सामर्थ्य प्राप्त करते हैं. (१४) मघोनः स्म वृत्रहत्येषु चोदय ये ददति प्रिया वसु. तव प्रणीती हर्यश्व सूरिभिर्विश्वा तरेम दुरिता.. (१५) हे इंद्र! आप ऐश्वर्यशाली और अश्ववान हैं. आप वृत्रासुर जैसे अत्याचारियों को नष्ट करने की शक्ति दीजिए. यजमानों को देने के लिए आप प्रिय धनों को प्रेरित कीजिए. शूरवीर और ज्ञानी आप की कृपा से पापों से छुटकारा पाएं. (१५) तीसरा खंड एदु मधोर्मदिन्तर ऽ४ सिञ्चाध्वर्यो अन्धसः. एवा हि वीर स्तवते सदावृधः.. (१) हे यजमानो! सोमरस मधुर, सुखदायी व इंद्र के लिए आनंददायी है. आप इंद्र की स्तुति कीजिए. वे ही स्तुति के योग्य हैं. आप सोमरस भी उन्हीं की सेवा में समर्पित कीजिए. (१) इन्द्र स्थातर्हरीणां न किष्टे पूर्व्यस्तुतिम्. उदान ऽ४ श शवसा न भन्दना.. (२) हे इंद्र! आप अश्वपति हैं. ऋषियों ने आप के लिए प्रार्थनाएं रची हैं. उन प्रार्थनाओं को (आप द्वारा दी गई) सामर्थ्य के अलावा और किसी तरह नहीं प्राप्त किया जा सकता है. (२) तं वो वाजानां पतिमहूमहि श्रवस्यवः. अप्रायुभिर्यज्ञेभिर्वावृधेन्यम्.. (३) ebook converter DEMO Watermarks*