भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 279, कुल 310 में से

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पृष्ठ 279

हे इंद्र! आप वैभवशाली, धनपति व फुर्तीले हैं. यजमान जो यज्ञ करते हैं, उन यज्ञों से आप बढ़ोत्तरी प्राप्त करते हैं. हम आप का आह्वान करते हैं. (३) तं गूर्धया स्वर्णरं देवासो देवमरतिं दधन्विरे. देवत्राहव्यमूहिषे.. (४) हे यजमानो! यज्ञ देवलोक का प्रतिनिधित्व करते हैं. आप इन यज्ञों की पूजा कीजिए. इन यज्ञों के माध्यम से यजमान दिव्य विभूतियां पाते हैं और धारण करते हैं. अग्नि हमारी हवियों को देवताओं तक पहुंचाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं. (४) विभूतरातिं विप्र चित्रशोचिषमग्निमीडिष्व यन्तुरम्. अस्य मेधस्य सोम्यस्य सोभरे प्रेमध्वराय पूर्व्यम्.. (५) हे ब्राह्मणो! आप अग्नि की उपासना कीजिए. यज्ञ की सफलता के लिए आप को यह उपासना करनी है. वे अतिशय वैभवदाता, प्रकाशमान, श्रेष्ठ और यज्ञ के प्रमुख हैं. (५) आ सोम स्वानो अद्रिभिस्तिरो वाराण्यव्यया. जनो न पुरि चम्वोर्विशद्धरिः सदो वनेषु दध्रिषे.. (६) हे सोम! पत्थरों से कूट कर आप का रस निकाला गया है, छान कर उस रस को पवित्र किया गया है. हरा सोमरस वन की लकड़ी के बने पात्र में उसी तरह प्रवेश कर रहा है, जैसे शूरवीर अपनी वीरता से नगर में प्रवेश करने जाता है. (६) स मामृजे तिरो अण्वानि मेष्यो मीढ्वांत्सप्तिर्न वाजयूः. अनुमाद्यः पवमानो मनीषिभिः सोमो विप्रेभिर्ऋक्वभिः.. (७) ब्राह्मण ऋत्विज् सोमरस को पवित्र कर रहे हैं. स्तोत्रों से वे इस की प्रशंसा कर रहे हैं. वे भेड़ के बाल से बनी छलनी से इसे छान रहे हैं. इसे छानने वाले ऋत्विज् शक्तिमान, हृष्टपुष्ट और घोड़े जैसे बलवान हैं. (७) वयमेनमिदा ह्यो ऽ पीपेमेह वज्रिणम्. तस्मा उ अद्य सवने सुतं भरा नूनं भूषत श्रुते.. (८) हे यजमानो! हम वज्रधारी इंद्र को पहले से ही सोमरस पिलाते रहे हैं. आज भी हमें उन्हें यह सोमरस पिलाना चाहिए. वे सोमपान और स्तोत्र श्रवण (सुनने) हेतु हमारे यज्ञ में पधारने की कृपा करें. (८) वृकश्चिदस्य वारण उरामथिरा वयुनेषु भूषति. सेमं न स्तोमं जुजुषाण आ गहीन्द्र प्र चित्रया धिया.. (९) हे यजमानो! भेड़िए जैसे भयंकर शत्रु भी इंद्र के सामने झुक जाते हैं. वे इंद्र हमारी प्रार्थना स्वीकार करने की कृपा करें. इंद्र हमें विवेक व अद्भुत बुद्धि प्रदान करने की कृपा करें. (९) ebook converter DEMO Watermarks*