सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 280, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंइन्द्राग्नी रोचना दिवः परि वाजेषु भूषथः. तद्वां चेति प्र वीर्यम्.. (१०) हे इंद्र! हे अग्नि! यह दिव्य गुण आप दोनों के लिए वीरता का परिचायक है. आप गुण रूपी धन से स्वर्गलोक में शोभायमान और भूषित होते हैं. (१०) इन्द्राग्नी अपसस्पर्युप प्र यन्ति धीतयः. ऋतस्य पथ्या ३ अनु.. (११) हे इंद्र! हे अग्नि! होता ऋत् (सत्य) के पथ का अनुगमन कर के सिद्धि की ओर समीप जाते हैं. (११) इन्द्राग्नी तविषाणि वां सधस्थानि प्रयांसि च. युवोरप्तूर्यं हितम्.. (१२) हे इंद्र! हे अग्नि! आप दोनों की शक्ति और विद्या हितकारी भाव से कार्य करती है. आप शीघ्र कार्य करने की सामर्थ्य रखते हैं. (१२) क ईं वेद सुते सचा पिबन्तं कद् वयो दधे. अयं यः पुरो विभिनत्त्योजसा मन्दानः शिप्यन्धसः.. (१३) इंद्र और उन की आयु को कौन जान सकता है? वे शत्रुओं के नगर को अपने ओज से नष्ट करने वाले हैं. वे मदमस्त रहते हैं और सुरक्षा कवचधारी हैं. (१३) दाना मृगो न वारणः पुरुत्रा च रथं दधे. न किष्ट्वा नि यमदा सुते गमो महा श्चरस्योजसा.. (१४) हे इंद्र! आप महान, विचरण कर्ता और आदरणीय हैं. आप अपने बल सहित यज्ञ में पधारने की कृपा कीजिए. आप को रथ ले कर यज्ञ में आने से भला कौन रोक सकता है? आप शत्रु को वैसे ही खोजते हैं, जैसे मतवाला हाथी अपने शत्रु को खोजता है. (१४) य उग्रः सन्ननिष्टृतः स्थिरो रणाय स ᳵ स्कृतः. यदि स्तोतुर्मघवा शृणवद्धवं नेन्द्रो योषत्या गमत्.. (१५) हे इंद्र! हमारी संस्कृत में रची हुई स्तुतियों को सुन कर आप अवश्य ही कहीं और नहीं जाएंगे. आप हमारे ही यज्ञ में आने की कृपा करेंगे. वे रण (युद्ध) में स्थिर, अस्त्रशस्त्र से सज्जित व उग्र रहते हैं. (१५) चौथा खंड पवमाना असृक्षत सोमाः शुक्रास् इन्दवः. अभि विश्वानि काव्या.. (१) हे सोम! आप का रस पवित्र व चमकीला है. उसे सभी काव्यों (वेद मंत्रों) के साथ संस्कारित किया जाता है. (१) पवमाना दिवस्पर्यन्तरिक्षादसृक्षत. पृथिव्या अधि सानवि.. (२)