भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 296, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 296

ऐसी श्रेष्ठ प्रार्थनाओं से आप की उपासना करते हैं. आप प्रजापालक हैं. आप हवि देने वाले यजमानों के पास पधारने की कृपा कीजिए. (४) उरुव्यचसे महिने सुवृक्तिमिन्द्राय ब्रह्म जनयन्त विप्राः. तस्य व्रतानि न मिनन्ति धीराः.. (५) हे इंद्र! आप विशाल और महान हैं. यजमान आप की स्तुति व हवि अर्पित करते हैं. धीर पुरुष इंद्र के व्रतों को डगमगाने नहीं देते हैं. (५) इन्द्रं वाणीरनूत्तमन्द्युमेव सत्रा राजानं दधिरे सहध्यै. हर्यश्वाय बर्हया समापीन्.. (६) हे इंद्र! आप सब के राजा हैं. आप के गुस्से के आगे कोई नहीं टिक सकता. आप की उपासना करने से शत्रु हारते हैं. हम अपने बंधुबांधवों को भी उन की उपासना के लिए प्रेरित करते हैं. (६) यदिन्द्र यावतस्त्वमेतावदहमीशीय. स्तोतारमद्धिधिषे रदावसो न पापत्वाय र ᳪ सिषम्.. (७) हे इंद्र! हम भी आप के समान धनपति होने की इच्छा रखते हैं. आप हम यजमानों को पोषक धन दीजिए. आप पापियों को धन मत दीजिए. हम उपासक आप से यही प्रार्थना करते हैं. (७) शिक्षेयमिन्महयते दिवेदिवे राय आ कुहचिद्विदे. न हि त्वदन्यमघवन्न आप्यं वस्यो अस्ति पिता च न.. (८) हे इंद्र! हम कहीं भी रहें पर आप के लिए यज्ञ करने के लिए समय व धन निकालते हैं. आप के अलावा हमारा कोई घनिष्ठ नहीं है, कोई पिता के समान सहायक भी (पालक) नहीं है. (८) श्रुधी हवं विविपानस्याद्रेर्बोधा विप्रस्यार्चतो मनीषाम्. कृष्वा दुवा ᳪ स्यन्तमा सचेमा.. (९) हे इंद्र! आप हमारे आमंत्रण को ध्यान से सुनने की कृपा कीजिए. आप ब्राह्मणों व मनीषियों की प्रार्थना पर ध्यान दीजिए. आप हमें समान चित्त वाला मान कर हमारे अनुरोध पर ध्यान देने की कृपा कीजिए. (९) न ते गिरो अपि मृष्ये तुरस्य न सुष्टुतिमसुर्यस्य विद्वान्. सदा ते नाम स्वयशो विवक्मि.. (१०) हे इंद्र! हम आप का नाम (यश) बढ़ाने वाली प्रार्थनाएं करते हैं (स्तोत्र गाते हैं). आप विद्वान् हैं. आप की शूरवीरता को हम जानते हैं. हम आप की उपासना करना नहीं छोड़ सकते. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*