सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 297, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंभूरि हि ते सवना मानुषेषु भूरि मनीषी हवते त्वामित्. मारे अस्मन्मघवं ज्योक्क:.. (११) हे इंद्र! मनुष्य आप के लिए सोमयज्ञ करते रहे हैं. मनीषी आप के लिए हवन भी करते रहे हैं. यज्ञ करने वालों को आप अपनेआप से कभी दूर मत कीजिए. (११) चौथा खंड प्रो ष्वस्मै पुरोरथमिन्द्राय शूषमर्चत. अभीके चिदु लोककृत्सङ्गे समत्सु वृत्रहा. अस्माकं बोधि चोदिता नभन्तामन्यकेषां ज्याका अधि धन्वसु.. (१) हे यजमानो! आप इंद्र के रथ के सामने उपासना करिए. आप शक्ति की उपासना कीजिए. इंद्र संसार के पालक, वृत्रहंता व प्रेरक हैं. हमारी हार्दिक इच्छा है कि हमारे शत्रुओं के धनुष की प्रत्यंचा टूट जाए. (१) त्व ꣳ सिंधु ꣳ र्वासृजो ऽ धराचो अहन्नहिम्. अशत्रुरिन्द्र जज्ञिषे विश्वं पुष्यसि वार्यम्. तं त्वा परि ष्वजामहे नभन्तामन्यकेषां ज्याका अधि धन्वसु.. (२) हे इंद्र! आप मेघों को भेदते हैं. आप नदियों के बहाव में आने वाली रुकावटों को दूर करते हैं. हम आप को हवि भेंट करते हुए प्रसन्न होते हैं. हमारी इच्छा है कि हमारे शत्रुओं के धनुष की प्रत्यंचा टूट जाए. (२) वि षु विश्वा अरातयो ऽ र्यो नशन्त नो धिय:. अस्तासि शत्रवे वधं यो न इन्द्र जिघा ꣳ सति. या ते रातिर्ददिर्वसु नभन्तामन्यकेषां ज्याका अधि धन्वसु.. (३) हे इंद्र! हम पर आक्रमण करने वाले को आप स्वयं अपने शस्त्रों से मार डालते हैं. हमारी बुद्धि को आप प्रेरणा दीजिए. आप हमें धनादि दान कीजिए. हमारी हार्दिक इच्छा है कि हमारे शत्रुओं के धनुष की प्रत्यंचा टूट जाए. (३) रेवाँ इद्रेवत स्तोता स्यात्त्वावतो मघोन: प्रेदु हरिव: सुतस्य.. (४) हे इंद्र! आप धनवान हैं. आप के उपासक भी धनवान हो जाते हैं. आप के उपासकों को सब प्रकार का धन प्राप्त होता है. (४) उक्थं च न शस्यमानं नागो रयिरा चिकेत. न गायत्रं गीयमानम्.. (५) हे इंद्र! आप वाणी से स्तुति न करने वाले अज्ञानी के भी मन की भावना जानते हैं. स्तुति करने वालों के मन की भावना को भी जानते हैं. आप गाया जाता हुआ साम गायन भी जानते हैं. (५) ebook converter DEMO Watermarks*