सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 305, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंइक्कीसवां अध्याय आशुः शिशानो वृषभो न भीमो घनाघनः क्षोभणश्चर्षणीनाम्. सङ्क्रन्दनो ऽ निमिष एकवीरः शत २४ सेना अजयत्साकमिन्द्रः.. (१) हे इंद्र! आप बैल की तरह भीमकाय, दुष्टनाशक, वैरियों के लिए क्षोभदायी, स्फूर्तिवान व आलस्यरहित हैं. अकेले आप ही ऐसे वीर हैं, जो सारी शत्रु की सेना को पराजित कर देते हैं. (१) सङ्क्रन्दनेनानिमिषेण जिष्णुना युत्कारेण दुश्च्यवनेन धृष्णुना. तदिन्द्रेण जयत तत्सहध्वं युधो नर इषुहस्तेन वृष्णा.. (२) हे इंद्र! आप शत्रुओं को क्रंदन करा (रुला) देने वाले हैं. आप आलस्यरहित हैं. आप विजेता व निपुण हैं. योद्धा इंद्र की सहायता से युद्ध जीत कर शत्रुओं को भगाते हैं. (२) स इषुहस्तैः स निष्षङ्गिभिर्वशी स २४ स्रष्टा स युध इन्द्रो गणेन. स २४ सृष्टजित्सोमपा बाहुशर्ध्यू ३ ग्रधन्वा प्रतिहिताभिरस्ता.. (३) इंद्र युद्ध (विद्या) में दक्ष हैं. वे सृष्टि के विजेता, सोमरस पीने वाले, बाहुबली, धनुर्धारी व शत्रुओं के नाशक हैं. वे तलवार और बाण धारण करने वाले योद्धाओं के सहयोग से शत्रुओं को वशीभूत कर लेते हैं. (३) बृहस्पते परि दीया रथेन रक्षोहामित्राँ अपबाधमानः. प्रभञ्जन्सेनाः प्रमृणो युधा जयन्नस्माकमेध्यविता रथानाम्.. (४) हे इंद्र! आप सब के पालनहार, राक्षसों के नाशक, शत्रुओं के बाधक, सेना के विध्वंसक व हमारे रथों के रक्षक हैं. युद्ध में हम विजयी हों. (४) बलविज्ञायः स्थविरः प्रवीरः सहस्वान्वाजी सहमान उग्रः. अभिवीरो अभिसत्वा सहोजा जैत्रमिन्द्र रथमा तिष्ठ गोवित्.. (५) हे इंद्र! आप सब के बल को जानते हैं. आप अत्यंत वीर, स्थविर और उग्रता सहन करने वाले हैं. आप बल सहित ही पैदा हुए हैं. आप महावीर व गोपालक हैं. आप विजयी रथ में बैठने की कृपा कीजिए. (५) गोत्रभिदं गोविदं वज्रबाहुं जयन्तमज्म प्रमृणन्तमोजसा. इम २४ सजाता अनु वीरयध्वमिन्द्र २४ सखायो अनु स २४ रभध्वम्.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*