भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 32, कुल 310 में से

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गुणगान करते हैं. आप हम पर कृपा करिए. (४) जराबोध तद्विविड्ढि विशेविशे यज्ञियाय. स्तोम २४ रुद्राय दृशीकम्.. (५) हे अग्नि! हम प्रार्थना कर के आप को आमंत्रित करते हैं. आप हम सब पर कृपा करने के लिए यज्ञ मंडप में आइए. दुष्टों का नाश करने वाले आप को हम सुंदर प्रार्थनाओं से बारबार आमंत्रित कर रहे हैं. (५) प्रति त्यं चारुमध्वरं गोपीथाय प्र हूयसे. मरुद्गिरग्न आ गहि.. (६) हे अग्नि! आप इस उत्तम यज्ञ में सोमपान के लिए बुलाए जाते हैं. आप मरुतों (देवताओं) के साथ आइए. (६) अश्वं न त्वा वारवन्तं वन्दध्या अग्निं नमोभिः. सम्राजन्तमध्वराणाम्.. (७) हे अग्नि! आप प्रसिद्ध (यज्ञ के) पूंछ वाले घोड़े के समान हैं. आप यज्ञ के रक्षक हैं. हम प्रार्थनाओं से आप की पूजा व नमस्कार कर रहे हैं. अर्थात् जैसे घोड़ा अपनी पूंछ से कष्ट देने वाले मच्छर आदि हटा देता है, वैसे ही आप अपनी लपटों (ज्वालाओं) से हमारे कष्ट दूर कीजिए. (७) और्वभृगुवच्छुचिमप्रवानवदा हुवे. अग्नि २४ समुद्रवाससम्.. (८) हे अग्नि! आप समुद्र में रहने वाले हैं. भृगु और अप्रवान जैसे ऋषियों ने जिस तरह सच्चे मन से आप की प्रार्थना की, उसी तरह हम भी सच्चे मन से आप की प्रार्थना करते हैं. (८) अग्निमिन्धानो मनसा धिय २४ सचेत मर्त्यः. अग्निमिन्धे विवस्वभिः.. (९) हे अग्नि! मनुष्य मन लगा कर आप को तथा अपनी श्रद्धा को जगाता है. सूर्य की किरणों के साथ आप को प्रकाशित करता है. (९) आदित्प्रत्नस्य रेतसो ज्योतिः पश्यन्ति वासरम्. परो यदिध्यते दिवि.. (१०) हे अग्नि! स्वर्गलोक से ऊपर सूर्य रूप में अग्नि प्रकाशित होती है. तभी सब प्राणी उस प्रकाश वाले तेज का दर्शन करते हैं. (१०) तीसरा खंड अग्निं वो वृधन्तमध्वराणां पुरूतमम्. अच्छा नप्त्रे सहस्वते.. (१) हे ऋत्विजो (उपासको)! अग्नि तुम्हारे अहिंसक यज्ञों में सहायक, श्रेष्ठ (उत्तम), सब के हितकारी व बलशाली हैं. तुम ज्वालाओं (लपटों) से बढ़ते हुए अग्नि की सेवा में जाओ. (१) अग्निस्तिग्मेन शोचिषा य २४ सद्विश्वं न्य ३ त्रिणम्. अग्निर्नो व २४ सते रयिम्.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*

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