भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 33, कुल 310 में से

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पृष्ठ 33

अग्नि अपनी तेज लपटों से राक्षसों और अन्य विघ्नों को नष्ट करें. अग्नि हमें सब प्रकार का धन (सुख) प्रदान करें. (२) अग्ने मृड महाँ अस्यय आ देवयुं जनम्. इयेथ बर्हिरासदम्.. (३) हे अग्नि! आप हमें सुख दीजिए. आप महान व गतिशील यानी सामर्थ्यवान हैं. आप देवताओं के दर्शन के इच्छुक यजमान के पास कुश (घास) के आसन पर विराजने के लिए यहां पधारिए. (३) अग्ने रक्षा णो अ ॐ हसः प्रति स्म देव रीषतः. तपिष्ठैरजरो दह.. (४) हे अग्नि! आप पापों से हमारी रक्षा कीजिए. आप दिव्य तेज वाले हैं. आप अजर (बुढ़ापे से रहित) हैं. आप हमारा नुकसान करने की इच्छा रखने वाले शत्रुओं को अपने तेजताप से भस्म कर दीजिए. (४) अग्ने युङ्क्ष्वा हि ये तवाश्वासो देव साधवः. अरं वहन्त्याशवः.. (५) हे अग्नि! अपने तेज गति वाले श्रेष्ठ और कुशल घोड़ों को (यहां पधारने के लिए) रथ में जोतिए. (५) नि त्वा नक्ष्य विशपते द्युमन्तं धीमहे वयम्. सुवीरमग्न आहुत.. (६) हे अग्नि! हम आप की शरण में हैं. यजमान आप को आमंत्रित करते हैं. आप की पूजा करते हैं. आप की पूजा से सब प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं. हम ने हृदय से आप को यहां स्थापित किया है. (६) अग्निर्मूर्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयम्. अपा ॐ रेता ॐ सि जिन्वति.. (७) हे अग्नि! आप सर्वोच्च (सब से ऊंचे) हैं. आप स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक का पालन करने वाले हैं. आप इन के स्वामी हैं. आप जल के सारे जीवों को जीवन देते हैं और काम में लगाते हैं. (७) इमम् षु त्वमस्माक ॐ सनिं गायत्रं नव्य ॐ सम्. अग्ने देवेषु प्र वोचः.. (८) हे अग्नि! आप हमारी इस हवि को देवताओं तक पहुंचाइए. हम गायत्री छंद में आप की प्रार्थना कर रहे हैं. आप हमारी इन दोनों चीजों को देवताओं तक पहुंचा दीजिए. (८) तं त्वा गोपवनो गिरा जनिष्ठदग्ने अङ्गिराः. स पावक श्रुधी हवम्.. (९) हे अग्नि! गोपवन ऋषि ने आप को अपनी स्तुति से उत्पन्न किया है. आप अंगों में रस के रूप में निवास करते हैं. आप पवित्र करने वाले हैं. आप हमारी प्रार्थना सुनिए. (९) परि वाजपतिः कविरग्निर्हव्यान्यक्रमीत्. दधद्रत्नानि दाशुषे.. (१०) हे अग्नि! आप सर्वज्ञ व अन्नों के स्वामी हैं. आप हवि के रूप में दिए गए पदार्थों को ebook converter DEMO Watermarks*