सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 34, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्वीकार करते हैं. उन हवियों को व्याप्त करते हैं यानी देवताओं तक पहुंचाते हैं. आप दानशील लोगों को धनधान्य प्रदान करते हैं. (१०) उदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः. दृशे विश्वाय सूर्यम्.. (११) सारे भुवनों को देखने के लिए सूर्य की किरणें जिस से उत्पन्न हुई हैं, ऐसे सूर्य के रूप में वे अग्नि को भलीभांति धारण किए रहती हैं. (११) कविमग्निमुप स्तुहि सत्यधर्माणमध्वरे. देवममीवचातनम्.. (१२) हे ऋत्विजो (यज्ञ करने वालो)! इस यज्ञ में आप सब ज्ञान वाले अग्नि की स्तुति कीजिए. वे सत्य धर्म से युक्त हैं. वे शत्रुओं का (रोगों का) नाश करने वाले हैं. (१२) शं नो देवीरभिष्टये शं नो भवन्तु पीतये. शं योरभि स्रवन्तु नः.. (१३) हमारा कल्याण हो. दिव्य जल हमारे पीने के लिए कल्याणकारी हो. जल रोग शांत करने वाला हो. जल सुखशांति देते हुए अमृत रूप में प्रवाहित हो. (१३) कस्य नूनं परीणसि धियो जिन्वसि सत्पते. गोषाता यस्य ते गिरः.. (१४) हे अग्नि! आप सत्य (सज्जन) के पालनहार हैं. आप इस समय किस तरह के मानव के कर्मों को सत्य मार्ग (ब्रज) तक पहुंचा रहे हैं. किस कर्म से आप की कृपा गौओं को प्राप्त कराने वाली होगी. (१४) चौथा खंड यज्ञायज्ञा वो अग्नये गिरागिरा व दक्षसे. प्रप्र वयममृतं जातवेदसं प्रियं मित्रं न श ॐ सिषम्.. (१) हे अग्नि! आप सब कुछ जानने वाले व अमर हैं. आप मित्र की तरह सहयोग करने वाले हैं. हम आप की स्तुति करते हैं. हे श्रोताओ! आप भी ऐसे अग्नि की स्तुति कीजिए. (१) पाहि नो अग्न एकया पाह्यू ३ त द्वतीयया. पाहि गीर्भिस्तिसृभिरूर्जा पते पाहि चतसृभिर्वसो.. (२) हे अग्नि! आप पहली स्तुति से हमारी रक्षा कीजिए. दूसरी स्तुति से हमें संरक्षण प्रदान कीजिए. तीसरी स्तुति से हमारी रक्षा (पालनपोषण रूप) कीजिए. चौथी स्तुति से आप हमारी सब प्रकार से रक्षा कीजिए. हे अग्नि! आप सब को संरक्षण देने वाले हैं. (२) बृहद्भिरग्ने अर्चिभिः शुक्रेण देव शोचिषा. भरद्वाजे समिधानो यविष्ठ्य रेवत्पावक दीदिहि.. (३) हे अग्नि! आप बड़ी ज्वालाओं वाले व युवा हैं. आप संपन्नता व पवित्रता देने वाले हैं. ebook converter DEMO Watermarks*