भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 35, कुल 310 में से

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आप अपने प्रखर तेज से भरद्वाज (ऋषि) के लिए अत्यंत तेजस्वी रूप में प्रज्वलित होइए. (३) त्वे अग्ने स्वाहुत प्रियासः सन्तु सूरयः. यन्तारो ये मघवानो जनानामूर्वं दयन्त गोनाम्.. (४) हे अग्नि! यजमान भलीभांति हवन करते हैं. वे आप को प्रिय हों. जो धन देने वाले और प्रजा की देखभाल करने वाले हैं, वे भी आप को प्रिय हों. गौओं का पालन करने वाले आप को प्रिय हों. (४) अग्ने जरितर्विशपतिस्तपानो देव रक्षसः. अप्रोषिवान् गृहपते महाँ असि दिवस्पायुर्दुरोणयुः.. (५) हे अग्नि! आप ज्ञानी, प्रजा का पालनपोषण करने वाले, राक्षसों (कष्ट देने वालों) का नाश करने वाले, घर के स्वामी, उपासकों के घर को नहीं छोड़ने वाले व स्वर्गलोक के रक्षक हैं. आप हमारे घर में सदा निवास करिए. (५) अग्ने विवस्वदुषसश्चित्र १७ राधो अमर्त्य. आ दाशुषे जातवेदो वहा त्वमद्या देवाँ उषर्बुधः.. (६) हे अग्नि! आप अमर, प्राणिमात्र को जानने वाले और उषा (उषाकाल) से प्राप्त होने वाला विशेष धन दानदाता यजमान को दीजिए. आप सब कुछ जानने वाले हैं. आप उषाकाल में जागे हुए देवताओं को भी यहां आमंत्रित कीजिए. (६) त्वं नश्चित्र ऊत्या वसो राधा १७ सि चोदय. अस्य रायस्त्वमग्ने रथीरसि विदा गाधं तुचे तु नः.. (७) हे अग्नि! आप सर्वव्यापक, अद्भुत शक्ति वाले, दर्शनीय, अपार व बहुत क्षमतावान हैं. आप समृद्धि (वैभव) लाने में समर्थ हैं. आप हमें समृद्धि दीजिए. आप हमारी संतानों को भी समृद्धि एवं प्रतिष्ठा दीजिए. (७) त्वमित्सप्रथा अस्यग्ने त्रातर्ऋतः कविः. त्वां विप्रासः समिधान दीदिव आ विवासन्ति वेधसः.. (८) हे अग्नि! आप रक्षक हैं. आप (अपने गुण तथा धर्म के लिए) बहुत प्रसिद्ध हैं. आप सत्यवान और ज्ञानी हैं. हे तेजस्वी अग्नि! प्रज्वलित (प्रकाशित) हो जाने पर ज्ञानी जन आप की उपासना व सेवा करते हैं. (८) आ नो अग्ने वयोवृध १७ रयिं पावक श १७ स्यम्. रास्वा च न उपमाते पुरुस्पृह १७ सुनीती सुयशस्तरम्.. (९) हे अग्नि! आप पवित्र करने वाले व धनधान्य की समृद्धि करने वाले हैं. आप हमें यश ebook converter DEMO Watermarks*