भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 36, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 36

बढ़ाने वाला धन दीजिए. आप हमें सही रास्ते से आने वाला धन प्रदान करें. आप हमें ऐसा धन प्रदान करें जिसे अनेक लोग चाहते हों. (९) यो विश्वा दयते वसु होता मन्द्रो जनानाम्. मधोर्न पात्रा प्रथमान्यस्मै प्र स्तोमा यन्त्वग्नये.. (१०) यजमानों को सब प्रकार की समृद्धि दे कर आनंदित करने वाले अग्नि की हम पहले स्तुति करते हैं, जैसे उन्हें सब से पहले सोमरस का पात्र समर्पित किया जाता है. (१०) पांचवां खंड एना वो अग्निं नमसोजो नपातमा हुवे. प्रियं चेतिष्ठमरति ॐ स्वध्वरं विश्वस्य दूतममृतम्.. (१) हे उपासको! अन्न से शक्ति देने वाले (बल के पुत्र), पूर्णज्ञानी, स्नेह देने वाले, सुंदर यज्ञ वाले देवताओं के दूत अग्नि को मैं नमस्कारपूर्वक प्रार्थना से आमंत्रित करता हूं. (१) शेषे वनेषु मातृषु सं त्वा मर्तास इन्धते. अतन्द्रो हव्यं वहसि हविष्कृत आदिद्देवेषु राजसि.. (२) हे अग्नि! आप वनों में व्याप्त हैं. आप माताओं में गर्भ के रूप में व्याप्त हैं. आप शेष पदार्थों में भी फैले हैं. हम मनुष्य समिधाओं द्वारा आप को प्रज्वलित करते हैं. आप आलस्य रहित हैं. आप यजमान की हवि देवताओं तक पहुंचाते हैं. आप देवताओं के मध्य (बीच में) सुशोभित होते हैं. (२) अदर्शि गातुवित्तमो यस्मिन्व्रतान्यादधुः. उपो षु जातमार्यस्य वर्धनमग्निं नक्षन्तु नो गिरः.. (३) धर्म के मार्ग को पूरी तरह जानने वाले अग्नि प्रकट हो रहे हैं. इन के माध्यम से यज्ञ के नियम पूरे किए जाते हैं. अग्नि आर्यों को प्रगति देने वाले हैं. वे वाणी रूप में की जा रही हमारी प्रार्थनाओं को स्वीकार करने की कृपा करें. (३) अग्निरुक्थे पुरोहितो ग्रावाणो बर्हिरध्वरे. ऋचा यामि मरुतो ब्रह्मणस्पते देवा अवो वरेण्यम्.. (४) स्तोत्र वाले हिंसा रहित यज्ञ में सब से पहले अग्नि देवता की स्थापना की जाती है. सोमलता से रस निकालने वाले पत्थर एवं आसन भी स्थापित किए जाते हैं. हे मरुतो! हे ब्रह्मणस्पति! हे देव! हम वेदमंत्रों द्वारा अपनी रक्षा का अनुरोध करते हैं. (४) अग्निमीडिष्वावसे गाथाभिः शीरशोचिषम्. अग्नि ॐ राये पुरुमीढ श्रुतं नरो ऽ ग्निः सुदीतये छर्दिः.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित) · पृष्ठ 36, कुल 310 में से · BharatKosha