भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 52, कुल 310 में से

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पृष्ठ 52

हे इंद्र! आप अनेक प्रकार के वैभव वाले हैं. हमारी स्तुतियां बारबार आप के पास उसी तरह आना चाहती हैं, जैसे दूध वाली गाएं बारबार बछड़ों की ओर आती हैं. (२) अत्राह गोरमन्वत नाम त्वष्टुरपीच्यम्. इत्था चन्द्रमसो गृहे.. (३) गतिमान चंद्र मंडल में सूर्य का दिव्य तेज है, ऐसा विद्वान् मानते हैं अर्थात् सूर्य के छिप जाने पर उन्हीं के प्रकाश से चंद्रमा प्रकाशित होता है. (३) यदिन्द्रो अनयद्रितो महीरपो वृषन्तमः. तत्र पूषाभुवत्सचा.. (४) हे इंद्र! आप बहुत बरसात के रूप में जल प्रवाहित करते हैं, इस लोक तक पहुंचाते हैं तब पूषा देवता आप के सहायक होते हैं. वे पोषण करने में समर्थ देवता हैं. (४) गौर्धयति मरुता ᳵ श्रवस्युर्माता मघोनाम्. युक्ता वह्नी रथानाम्.. (५) पृथ्वी माता धनसंपन्न हैं. वे मरुतों के रथ में जुड़ी हुई हैं. वे सब ओर पूजित हैं. वे अन्न आदि उत्पन्न कर के अपने पुत्रों का पालनपोषण करती हैं. (५) उप नो हरिभिः सुतं याहि मदानां पते. उप नो हरिभिः सुतम्.. (६) हे इंद्र! आप सोम के स्वामी हैं. हम ने आप के लिए सोमरस निचोड़ कर रखा है. आप अपने हजारों घोड़ों से (सहित या माध्यम से) हमारे इस यज्ञ में पधारिए. आप जल्दी और बारबार पधारिए. (६) इष्टा होत्रा असृक्षतेन्द्रं वृधन्तो अध्वरे. अच्छावभृथमोजसा.. (७) हे इंद्र! हम यजमान बारबार आप की स्तुति करते हैं. हम अपने तेज से यज्ञ खत्म होने पर होने वाले स्नान तक बारबार आप के लिए आहुति प्रदान करते हैं. (७) अहमिद्धि पितुषपरि मेधामृतस्य जग्रह. अह ᳵ सूर्य इवाजनि.. (८) हे इंद्र! आप पालनकर्ता हैं. हम ने आप की बुद्धि को अपनी ओर आकर्षित कर लिया है. यानी हम ने आप की कृपा प्राप्त कर ली है. अब हम सूर्य देव के समान प्रकाशित हो गए हैं. (८) रेवतीर्नः सधमाद इन्द्रे सन्तु तुविवाजाः. क्षुमन्तो याभिर्मदेम.. (९) हे इंद्र! आप की कृपा से हम धनधान्य संपन्न हो कर प्रसन्न हो जाते हैं. हमारी गायों पर भी आप की कृपा हो. वे भी अधिक अन्न और दूध देने वाली हो जाएं. (९) सोमः पूषा च चेततुर्विश्वासा ᳵ सुक्षितीनाम्. देवत्रा रथ्योर्हिता.. (१०) सोम और पूषा देवताओं के रथ में विराजमान हैं. वे इसी रथ में बैठने योग्य हैं. वे सभी मनुष्यों का उत्साह बढ़ाने वाले हैं. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*