सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 65, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंय ऋते चिदभिश्रिषः पुरा जत्रुभ्य आतृदः. सन्धाता सन्धिं मघवा पुरूवसुर्निष्कर्ता विहुत पुनः.. (२) हे इंद्र! आप गले की नाड़ियों को खून निकलने पर भी बिना जोड़ने की सामग्री के ही जोड़ सकते हैं. इंद्र बहुत वैभव वाले हैं. वे कटे हुए भागों को फिर से जोड़ सकते हैं. (२) आ त्वा सहस्रमा शतं युक्ता रथे हिरण्यये. ब्रह्मयुजो हरय इन्द्र केशिनो वहन्तु सोमपीतये.. (३) हे इंद्र! आप के घोड़े मंत्र के प्रभाव से रथ में जुत जाते हैं. आप के घोड़ों की गरदन पर लंबे-लंबे बाल हैं. वे सैकड़ों घोड़े आप के सुनहरे रथ में जुत जाएं और सोमपान के लिए आप को यज्ञ में ले आएं, यह अनुरोध है. (३) आ मन्द्रैरिन्द्र हरिभिर्याहि मयूररोमभिः. मा त्वा के चिन्नि येमुरिन्न पाशिनो ऽ ति धन्वेव तां इहि.. (४) हे इंद्र! जैसे राहगीर शीघ्र ही रेगिस्तान को पार कर लेता है, वैसे ही आप भी मोर जैसे रोम वाले घोड़ों से यहां आइए. जाल फैलाने वाले शिकारी आप की राह में रोड़ा न अटका सकें. (४) त्वमङ्ग प्र श ंश सिषो देवः शविष्ठ मर्त्यम्. न त्वदन्यो मघवन्नस्ति मर्दितेंद्र ब्रवीमि ते वचः.. (५) हे इंद्र! आप बलवान व प्रकाश वाले हैं. आप अपने पूजकों की प्रशंसा करते हैं. आप धनवान हैं. आप के अलावा कोई सुख देने वाला नहीं है. इसी कारण मैं आप की स्तुति करता हूं. (५) त्वमिन्द्र यशा अस्यृजीषी शवसस्पतिः. त्वं वृत्राणि ह ंश स्यप्रतीन्येक इत्पुर्व्वनुत्तश्चर्षणीधृतिः.. (६) हे इंद्र! आप शक्तिशाली हैं. आप सोमरस पीने वाले और यशवान हैं. आप यजमानों के हित के लिए बड़े से बड़े शत्रु को भी अकेले ही नष्ट कर सकते हैं. (६) इन्द्रमिद्देवतातय इन्द्रं प्रत्यत्यध्वरे. इन्द्र ंश समीके वनिनो हवामह इन्द्रं धनस्य सातये.. (७) देवों के लिए किए जाने वाले यज्ञ में हम इंद्र को ही आमंत्रित करते हैं. यज्ञ के शुरू और समापन दोनों ही समय हम इंद्र को आमंत्रित करते हैं. धन लाभ के लिए हम इंद्र को ही आमंत्रित करते हैं. आप शीघ्र पधारिए. (७) इमा उ त्वा पुरूवसो गिरो वर्धन्तु या मम. पावकवर्णाः शुचयो विपश्चितो ऽ भिस्तोमैरनूषत.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*