भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 64, कुल 310 में से

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पृष्ठ 64

आ व इन्द्रं पुरुहूतं नमे गिरा नेमिं तष्टेव सुद्रुवम्.. (६) इंद्र तारनहार हैं. हम बुद्धि से अन्न प्राप्त करना चाहते हैं. जैसे बढ़ई अपनी कारीगरी से लकड़ी को नम्र कर के पहिए को गाड़ी के अनुकूल कर लेता है, वैसे ही हम इंद्र देव को अपनी स्तुतियों से अपने अनुकूल करना चाहते हैं. (६) पिबा सुतस्य रसिनो मत्स्वा न इन्द्र गोमतः. आपिनों बोधि सधमाद्ये वृधे ३ ऽ स्मां अवन्तु ते धियः.. (७) हे इंद्र! आप गाय का दूध मिला कर तैयार किए हुए रसीले सोमरस को पीजिए. उसे पी कर आप प्रसन्न होइए. आप हमें धन देने वाले बंधु बनिए. आप हमें प्रगति की राह दिखाइए. आप की बुद्धि हम यजमानों की रक्षा करे. (७) त्व २४ ह्येहि चेरवे विदा भगं वसुत्तये. उद्वावृषस्व मघवन् गविष्टय उदिन्द्राश्वमिष्टये.. (८) हे इंद्र! आप मुझे धन देने के लिए आइए. अच्छे आचारविचार वाले हम लोगों को राह दिखाइए व धन दीजिए. हम गायों के इच्छुक हैं. हमें गोधन दीजिए. हम घोड़ों के इच्छुक हैं. हमें अश्वधन दीजिए. (८) न हि वश्चरमं च न वसिष्ठः परिम २४ सते. अस्माकमद्य मरुतः सुते सचा विश्वे पिबन्तु कामिनः.. (९) हे मरुद्गणो! वसिष्ठ ऋषि आप में से छोटों को भी छोड़ कर स्तुति नहीं करते हैं अर्थात् छोटों की भी स्तुति करते हैं. आज हमारे इस सोम यज्ञ में आप सभी इकट्ठे हो कर सोमरस पीजिए. (९) मा चिदन्यद्वि श २४ सत सखायो मा रिषण्यत. इन्द्रमित्स्तोता वृषण सचा सुते मुहुरुक्था च श २४ सत.. (१०) हे यजमानो! आप इंद्र के अलावा किसी अन्य देव की स्तुति मत करो. बेकार मेहनत मत करो. एक साथ सोम यज्ञ में बलवान इंद्र की ही स्तुति करो. उन्हीं के बारे में प्रार्थनाओं को बारबार उचारो. (१०) दूसरा खंड नकिष्टं कर्मणा नशद्यश्चकार सदावृधम्. इन्द्रं न यज्ञैर्विश्वगूर्तमृभ्वसमधृष्टं धृष्णुमोजसा.. (१) हे यजमानो! इंद्र सदा उन्नतिशील व समृद्ध हैं. वे सब से पूजित और महान बलशाली हैं. किसी से नहीं दबने वाले व शत्रुनाशक हैं. जो यज्ञ से इंद्र को अपने अनुकूल बना लेता है, उसे कोई भी नहीं दबा सकता है. (१) ebook converter DEMO Watermarks*

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