सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 71, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंइन्द्राग्नी अपादियं पूर्वागात्पद्वतीभ्यः. हित्वा शिरो जिह्वया रारपच्चरत् त्रि २४ शत्पदा न्यक्रमीत्.. (९) हे इंद्र! हे अग्नि! बिना पैरों वाली उषा पैरों वाली जनता से पहले आ जाती हैं. सिर न होने पर भी जीभ से सब को प्रेरणा देती हुई एक दिन में तीस मुहूर्तों को पार कर जाती हैं. (९) इन्द्र नेदीय एदिहि मितमेधाभिरूतिभिः. आ शंतम शंतमाभिरभिष्टिभिरा स्वापे स्वापिभिः.. (१०) हे इंद्र! हमारी यज्ञशाला बहुत नजदीक (पास) है. आप बुद्धिमानों और रक्षा की इच्छा रखने वालों के साथ पधारिए. आप बहुत सुखदायी हैं. आप बहुत शांतिदायी व बंधु हैं. आप अवश्य पधारिए. (१०) छठा खंड इत ऊती वो अजरं प्रहेतारमप्रहितम्. आशुं जेतार २४ होतार २४ रथीतममतूर्तं तुग्रियावृधम्.. (१) हे इंद्र! आप बूढ़े नहीं होते. आप शत्रुओं को मारने वाले हैं. आप जल्दी विजय पाने वाले हैं. आप बहुत तेज गति वाले हैं. आप जल्दी यज्ञ में जाने वाले हैं. आप अच्छे रथ चलाने वाले हैं. आप जल को बढ़ाने वाले हैं. हे यजमानो! ऐसे इंद्र को आप अपनी रक्षा के लिए बुलाइए. (१) मो षु त्वा वाघतश्च नारे अस्मन्नि रीरमन्. आरात्ताद्वा सधमादं न आ गहीह वा सन्नुप श्रुधि.. (२) हे इंद्र! यज्ञ करने वाले भी आप को हम से दूर न कर सकें. आप दूर रह कर भी हमारे पास जल्दी आइए. आप यहीं रह कर हमारी स्तुतियां सुनिए. (२) सुनोता सोमपाव्ने सोममिन्द्राय वज्रिणे. पचता पक्तीरवसे कृणुध्वमित्पृणन्नित्पृणते मयः.. (३) हे यज्ञ करने वालो! वज्रधारी इंद्र के लिए सोमरस निचोड़ो. इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पुरोडाश (भोग) पकाइए (बनाइए). यजमान की प्रसन्नता के लिए इंद्र स्वयं हवि ग्रहण करते हैं. (३) यः सत्राहा विचर्षणिरिन्द्रं त २४ हूमहे वयम्. सहसमन्यो तुविन्नृम्ण सत्पते भवा समत्सु नो वृधे.. (४) हे इंद्र! आप शत्रुओं का वध करने वाले हैं. आप सब को देखने वाले हैं. हम स्तुतियों से आप को बुलाते हैं. आप क्रोध वाले, बहुत धन वाले व सज्जनों के पालक हैं. आप युद्धों में ebook converter DEMO Watermarks*