भारतकोश
समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary

आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा

DevanagariHindipublished226 पृष्ठ

पृष्ठ 157, कुल 226 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 157

अध्याय - 9 कर्म-बन्ध के क्षय से मोक्ष होता है - जह बंधे छेत्तूण य बंधणबद्धो दु पावदि विमॉक्खं। तह बंधे छेत्तूण य जीवो संपावदि विमॉक्खं॥ (9-5-292) जिस प्रकार बन्धन में पडा हुआ कोई पुरुष बन्धनों को काटकर अवश्य ही मुक्ति प्राप्त करता है, उसी प्रकार जीव कर्म-बन्ध को काटकर मोक्ष प्राप्त करता है। Just as a man, bound in shackles, can surely get rid of the bondage by breaking the shackles, similarly, a man can get liberated if he makes efforts to get rid of the karmic bondage. भेद-विज्ञान से मोक्ष होता है - बंधाणं च सहावं वियाणिदुं अप्पणो सहावं च। बंधेसु जो विरज्जदि सो कम्मविमॉक्खणं कुणदि॥ (9-6-293) बन्धों के स्वभाव को और आत्मा के स्वभाव को जानकर जो पुरुष बन्धों के प्रति विरक्त होता है, वह कर्मों से मुक्त होता है। After knowing the nature of the karmic bondages and also the nature of the Self, the man who keeps at bay all karmic bondages, gets liberated. 140