साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 11, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीः ॥
श्रीसाम्बपुराणम्
भाषाटीकासहितम्
प्रथमोऽध्यायः
मङ्गलाचरणम्
नमः सवित्रे जगदेकचक्षुषे जगत्प्रसूतिस्थितिनाशेहेतवे ।
त्रयीमयाय त्रिगुणात्मधारिणे विरिञ्चिनारायणशङ्करात्मने ॥१॥
समस्तप्राणदेहाय सदा विशुद्धबुद्धये ।
त्रयीमयाय देवाय नमो लोकैकसाक्षिणे ॥२॥
मङ्गलाचरण— जगत् के एकमात्र चक्षुस्वरूप, विश्व की सृष्टि-स्थिति तथा विनाश के कारण, त्रयीमय (ऋक्, यजुः, सामवेदात्मक), त्रिगुणरूप—ब्रह्मा, नारायण तथा शंकरस्वरूप (रजोगुण = ब्रह्मा। सत्त्वगुण = नारायण। तमोगुण = शंकर) प्रकटित सविता देव को नमस्कार है।
सबके प्राण तथा देहरूप, सर्वदा विशुद्ध बुद्धियुक्त, सकल लोकसमूह के एकमात्र साक्षी, त्रयीमय देवता को नमस्कार है॥१-२॥
पितामहाय कृष्णाय योगिनेऽव्यक्तरूपिणे ।
भूतभव्यभविष्याय विश्वसंसृष्टये नमः ॥३॥
योगी, अव्यक्तरूपी, भूत-भविष्यत्-वर्त्तमान में भी स्थायी, विश्वसृष्टि करने वाले पितामह कृष्ण को (कृष्णद्वैपायन व्यास को) नमस्कार है (धृतराष्ट्र आदि के जन्म के कारण होने से इन्हें पितामह कहा जाता है)॥३॥
नमस्तस्मै मुनीशाय सन्नताय तपस्विने ।
शान्ताय वीतरागाय तस्मै ज्ञानात्मने नमः ॥४॥
उन प्रसिद्ध मुनीश्वर को नमस्कार है। वे सज्जनों द्वारा प्रणम्य हैं। तपस्वी, शान्त तथा विरक्त ज्ञानस्वरूप को नमस्कार है॥४॥
नमस्तस्मै विधात्रे च स्वव्यक्तप्रभवाय च ।
भूतसंहारतिग्माय भास्कराय गभस्तिने ॥५॥