साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१०१
सुखा (वरुणपुरी) में आधी रात को तथा विभा (सोम की पुरी) में सूर्य अस्त होते हैं। वैवस्वत संयमनी पुरी में जब मध्यगामी होते हैं तब वरुण की सुखा पुरी में उदित सूर्य दृश्यमान होते हैं। किन्तु तब विभा में अर्धरात्रि होती है एवं माहेन्द्र (अमरावती) पुरी में सूर्य का अस्तगमन होता है।।६-७।।
सुखायां चापि वारुण्यां मध्याह्ने चार्यमा यदा।
विभायां सोमपुर्यां स उत्तिष्ठति विभावसुः ॥८॥
सुखा नामक वरुण की पुरी में जब मध्याह्न में अर्यमा (सूर्य) रहते हैं तब विभा की सोमपुरी में विभावसु (सूर्य) उदित होते हैं।।८।।
रात्र्यर्धे त्वमरावत्यामस्तमेति यमस्य वै।
सोमपुर्यां विभायान्तु मध्याह्ने त्वर्यमा यदा ॥९॥
जब अमरावती में अर्द्धरात्रि होती है, तब यमपुरी में सूर्यास्त होता है। तब सोमपुरी विभा में मध्याह्न होता है।।९।।
माहेन्द्र्याममरावत्यामुत्तिष्ठति दिवाकरः।
अर्द्धरात्रं संयमने वारुण्यामस्तमेति च ॥१०॥
महेन्द्रपुरी अमरावती में जब दिवाकर उदित होते है, संयमनी में तब आधी रात होती है तथा वरुण की पुरी में सूर्यास्त होता है।।१०।।
एवं चतुर्षु पार्श्वेषु मेरोः कुर्वन् प्रदक्षिणाम्।
उदयास्तमने चासावुत्तिष्ठति पुनः पुनः॥११॥
इस प्रकार मेरु के चारो ओर प्रदक्षिणा करते हुये अस्त होने के पश्चात् बार-बार सूर्य उदित होता है।।११।।
पूर्वाह्ने वापराह्ने च द्वौ द्वौ देवालयौ तु सः।
तपत्येकञ्च मध्याह्ने ताभिरेव गभस्तिभिः ॥१२॥
पूर्वाह्न तथा अपराह्न में वह सूर्य दो-दो देवालय एवं मध्याह्न में एक देवालय में सब किरणों द्वारा ताप प्रदान करते हैं।।१२।।
उदितो वर्धमानाभिरामध्याक्रान्तये रविः।
ततः परं ह्रसन्तीभिर्गोभिरस्तु नियच्छति ॥१३॥
रवि उदित होने पर (मेरु) अतिक्रम के लिये क्रमशः वर्द्धमान किरण प्रकाशित करके एवं तदनन्तर क्षीण किरणों के साथ अस्तगमन करता है।।१३।।
यत्रोद्यन् दृश्यते चैव स तेषामुदयः स्मृतः।
अदृश्यं गच्छते यत्र तेषामस्तं तदुद्यते ॥१४॥