भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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१२८ श्रीसाम्बपुराणम्

शरीरारोग्यदश्चैव धनवृद्धियशस्करः।
स्तवराज इति ख्यातस्त्रिषु लोकेषु विश्रुतः॥ १८॥

यह शरीर के लिये आरोग्यप्रद, धनवर्धक तथा यशप्रद स्तवराज तीनों लोकों में प्रसिद्ध है॥१८॥

य एतेन महाबाहो द्वे सन्ध्येऽस्तमनोदये।
स्तौति मां प्रणतो भूत्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥१९॥
कायिकं वाचिकं चापि मानसं यच्च दुष्कृतम्।
तत् सर्वमेकजाप्येन प्रणश्यति ममाग्रतः ॥२०॥
एष जाप्यश्च होमश्च सन्ध्योपासनमेव च।
बलिमन्त्रोऽर्घ्यमन्त्रश्च धूपमन्त्रस्तथैव च॥२१॥

हे महाबाहो! जो व्यक्ति दोनों सन्ध्या के समय (सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय) इस स्तव के द्वारा प्रणत होकर मेरी स्तुति करेगा, वह समस्त पापों से मुक्त हो जायेगा। समस्त कायिक, वाचिक तथा मानसिक दुष्कृत मेरे समक्ष इस स्तुति के मात्र एक जप से ही समाप्त हो जाते हैं। यह मन्त्र जाप्य (जपयोग्य) है। इससे होम, सन्ध्या, उपासना, बलि (उपहार प्रदान) किया जा सकता है। यही अर्घ्य का तथा धूप-प्रदान का भी मन्त्र है॥१९-२१॥

अन्नप्रदाने स्नाने च प्रणिपाते प्रदक्षिणे।
पूजितोऽयं महामन्त्रः सर्वव्याधिहरः शुभः॥२२॥

इस मन्त्र से अन्नदान, स्नान, प्रणाम तथा प्रदक्षिणा भी की जा सकती है। यह महामन्त्र पूजित होने पर व्याधिविनाशक तथा शुभप्रद होता है॥२२॥

एवमुक्त्वा तु भगवान् भास्करो जगदीश्वरः।
आमन्त्र्य कृष्णतनयं तत्रैवान्तरधीयत ॥२३॥
साम्बोऽपि स्तवराजेन स्तुत्वा सप्ताश्ववाहनम्।
पूतात्मा नीरुजः श्रीमाँस्तस्माद्रोगाद्विमुक्तवान्॥२४॥

इति श्रीसाम्बपुराणे रोगापनयने श्रीसूर्यवक्त्रविनिःसृतस्तवराजवर्णनं नाम पञ्चविंशतितमोऽध्यायः


यह कहकर जगत् के नियामक भगवान् भास्कर कृष्णपुत्र साम्ब से विदा लेकर वहाँ से अन्तर्हित हो गये। साम्ब भी इस स्तवराज से सप्त अश्ववाहन सूर्य की स्तुति करके पवित्रात्मा होकर, नीरोग, शोभायुक्त (श्रीमान्) हो कुष्ठ रोग से मुक्त हो गये॥२३-२४॥

श्री साम्बपुराण में सूर्यकृत स्तवराजवर्णन नामक पञ्चविंश अध्याय समाप्त