साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 137, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ेंपञ्चविंशोऽध्यायः
(श्रीसूर्यस्तवराजवर्णनम्)
वशिष्ठ उवाच
स्तुवंस्तत्र ततः साम्बः कृशो धमनिसन्ततः।
राजन्नामसहस्रेण सहस्रांशुं दिवाकरम् ॥१॥
खिद्यमानं तु तं दृष्ट्वा सूर्यः कृष्णात्मजं तदा।
स्वप्ने तु दर्शनं दत्त्वा पुनर्वचनमब्रवीत् ॥२॥
वशिष्ठ कहते हैं—महाराज साम्ब सहस्रांशु दिवाकर के सहस्र नाम के द्वारा स्तव करते-करते जब कृश एवं धमनीशिरा-मात्र हो गये तब खिद्यमान कृष्णपुत्र साम्ब को देखकर सूर्य ने उनको स्वप्न में दर्शन देकर इस प्रकार कहा।।१-२।।
सूर्य उवाच
साम्ब साम्ब महाबाहो शृणु जाम्बवतीसुत।
अलं नामसहस्रेण पठस्वेमं स्तवं शुभम् ॥३॥
यानि नामानि गुह्यानि पवित्राणि शुभानि च।
तानि ते कीर्त्तयिष्यामि श्रुत्वा त्वमवधारय ॥४॥
सूर्य कहते हैं—साम्ब-साम्ब! महाबाहो! जाम्बवतीनन्दन! सहस्र नामों का प्रयोजन नहीं है। तुम इस शुभ स्तव का पाठ करो। ये नाम अत्यन्त गुप्त हैं, पवित्र तथा शुभप्रद हैं। उन्हें मैं कहता हूँ। तुम स्थिर होकर धारण करो।।३-४।।
ॐ विकर्त्तनो विवस्वांश्च मार्त्तण्डो भास्करो रविः।
लोकप्रकाशकः श्रीमाँल्लोकचक्षुर्गृहेश्वरः ॥५॥
लोकसाक्षी त्रिलोकेशः कर्त्ता हर्त्ता तमिस्रहा।
तपनस्तापनश्चैव शुचिः सप्ताश्ववाहनः ॥६॥
गभस्तिहस्तो ब्रह्मा च सर्वदेवनमस्कृतः।
एकविंशतिरित्थेष स्तव इष्टः सदा मम ॥७॥
ॐ, विकर्तन, विवस्वान्, मार्तण्ड, भास्कर, रवि, लोकप्रकाशक, श्रीमान्, लोकचक्षु, ग्रहेश्वर, लोकसाक्षी, त्रिलोकेश, कर्त्ता, हर्त्ता, तमिस्रहा, तपन, तापन, शुचि, सप्ताश्ववाहन, गभस्तिहस्त, ब्रह्मा एवं सर्वदेवनमस्कृत—इन इक्कीस नामों से स्तुति मुझे सदा प्रिय है।।५-७।।