साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१८ | श्रीसाम्बपुराणम्
आभिर्द्वादशभिस्तेन सूर्येण परमात्मना।
सर्वं जगदिदं व्याप्तं मूर्त्तिभिस्तु नराधिपः॥७॥
इन्द्र, धाता, पर्जन्य, पूषा, त्वष्टा, अर्यमा, भग, विवस्वान्, विष्णु, अंशु, वरुण तथा मित्र। हे नराधिप! परमात्मा सूर्य अपनी इन द्वादश मूर्तियों से समस्त जगत् को व्याप्त करके स्थित हैं॥६-७॥
तस्या या प्रथमा मूर्त्तिरादित्यस्येन्द्रसंज्ञिता।
स्थिता सा देवराजत्वे देवानामनुशासिनी ॥८॥
आदित्य की प्रथम मूर्त्ति इन्द्र के नाम से विख्यात है। यह मूर्त्ति देवगण के शासक देवराजरूप में वर्त्तमान है॥८॥
द्वितीयार्कस्य या मूर्त्तिर्नाम्ना धातेति कीर्त्तिता।
स्थिता प्रजापतित्वे सा विविधाः सृजते प्रजाः ॥९॥
सूर्य की द्वितीय मूर्त्ति का नाम है—धाता। यह प्रजापति रूप से नानाविध प्रजा की सृष्टि करती है॥९॥
तृतीयार्कस्य या मूर्त्तिः पर्जन्य इति विश्रुता।
मेघे व्यवस्थिता सा तु वर्षते च गभस्तिभिः ॥१०॥
सूर्य की तृतीय मूर्त्ति पर्जन्य के नाम से ख्यात है। यह मेघमण्डल में स्थित होकर अपनी किरणों से वर्षा करती है॥१०॥
चतुर्थी तस्य या मूर्त्तिर्नाम्ना पूषेति विश्रुता।
अन्ने व्यवस्थिता सा तु प्रजाः पुष्णाति नित्यशः ॥११॥
इनकी चतुर्थ मूर्त्ति पूषा नाम से विख्यात है। यह अन्न में स्थित होकर नित्य समस्त प्रजा का पोषण करती है॥११॥
पञ्चमी तस्य या मूर्त्तिर्नाम्ना त्वष्टेति विश्रुता।
स्थिता वनस्पतौ सा तु ओषधीषु च सर्वशः ॥१२॥
इनकी पञ्चम मूर्त्ति त्वष्टा के नाम से प्रसिद्ध है। यह वनस्पति तथा औषधियों में सर्वतोभावेन स्थित है॥१२॥
मूर्त्ति षष्ठी रवेर्या तु अर्यमा इति विश्रुता।
वायोः सञ्चरणार्था सा देहेष्वेव समाश्रिता ॥१३॥
इनकी षष्ठ मूर्त्ति को अर्यमा कहते हैं। यह वायु के संचरण के कारण सभी देह में स्थित है॥१३॥