भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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२८४ श्रीसाम्बपुराणम्

ॐ प्रदीप्ताननाय नमः। ॐ कुमाराय नमः। ॐ घृणिपाय नमः। ॐ अंगावहाय नमः। ॐ विराजे नमः। ॐ केशिने नमः। ॐ सुरराजाय नमः। ॐ अरिष्टाय नमः। ॐ माषाय नमः। ॐ अनन्ताय नमः। ॐ निक्षुभाय नमः। ॐ तेजोवहाय नमः—एते गणाधिपानां मन्त्राः।

ॐ क्षुपायै नमः। ॐ मैत्र्यै नमः। ॐ प्रेमायै नमः। ॐ श्यामायै नमः। ॐ रोचिषे नमः। ॐ दीप्तये नमः। ॐ सुवर्चलायै नमः—एते मातृमन्त्राः।

ॐ चन्द्राय हुं नमः। ॐ शुक्राय हुं नमः। ॐ बृहस्पतये हुं नमः। ॐ अङ्गारकाय हुं नमः। ॐ शनैश्चराय हुं नमः। ॐ राहवे हुं नमः। ॐ केतवे हुं नमः। ॐ बुधाय हुं नमः—एते ग्रहाणां मन्त्राः।

ॐ इन्द्राय सुराधिपतये नमः। ॐ अग्नये तेजोऽधिपतये नमः। ॐ यमाय प्रेताधिपतये नमः। ॐ निर्ऋतये रक्षोऽधिपतये नमः। ॐ वरुणाय जलाधिपतये नमः। ॐ वायवे प्राणाधिपतये नमः। ॐ कुबेराय यक्षाधिपतये नमः। ॐ शङ्कराय सर्वविद्याधिपतये नमः। ॐ ब्रह्मणे सर्वलोकाधिपतये नमः। ॐ शेषाय सर्वनागाधिपतये नमः—एते दिग्देवतानां मन्त्राः।

ॐ तेजोऽधिपतये नमः—दीपमन्त्रः। ॐ अर्काय गृहाणामृतम्—नैवेद्यमन्त्रः। ॐ जलकुन्दलाय दिव्याय तोद्यप्रियाय नमः—आतोद्यमन्त्राः। ॐ अंशुमते देवाय गोपाय ठः ठः—पूजाजपन्यासमन्त्रः।

अब मूल में 'ॐ विश्वात्मने नमः' इत्यादि मन्त्रों से विश्वात्मा, हृदयशुक्रज्योतिष, चित्रज्योतिष, सत्यज्योतिष, अग्नि, शुक्र, हरित तथा अत्यग्नि की पूजा करे। यह यथाक्रमेण अश्वसमूह का संग्रह है।

तदनन्तर ‘ॐ सर्पाय नमः' इत्यादि मूल में अंकित मन्त्रों से वासुकिहृदय, चक्रहृदय, अरुणहृदय, पद्महृदय की अर्चना करके ‘ॐ आदित्याय हे हे मिहिरागच्छ गच्छ हुं ख स्वाहा' मन्त्र से सूर्य का आवाहन करना चाहिये। यह है—सर्वाह्लादन मन्त्र।

'खखोल्काय स्वाहा' मूल मन्त्र है। आकाशवासी सभी लोकों के अधिपति यहाँ रहिये—स्वाहा (ॐ व्योमव्यापिने सर्वलोकाधिपतये तिष्ठ तिष्ठ स्वाहा)—यह स्थापना मन्त्र है। तदनन्तर ॐ अर्काय स्वाहा—हृदयम्, ॐ प्रदीप्ताय स्वाहा—शिरः, ॐ विपिटये स्वाहा—शिखाम्, ॐ जगच्चक्षुषे स्वाहा—नेत्रम्, ॐ पद्माकराय हुं स्वाहा—कवचम्। ॐ महातेजसे हुं फट्—अस्त्रम्। इस प्रकार न्यास करना चाहिये।

अब ‘ॐ गं गणाधिपतये' इत्यादि संरोध मन्त्र है। 'ॐ आकाशविकासिने' इत्यादि सन्निधान मन्त्र है। (यहाँ-जहाँ भी 'ठः ठः' लिखा है, वहाँ 'ठः ठः' के स्थान पर 'स्वाहा' लगाये।) ‘ॐ इरिष्ट' इत्यादि मन्त्र से पाद्य प्रदान करे। ‘ॐ गभस्तिने' इत्यादि मन्त्र से