भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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२९६ | श्रीसाम्बपुराणम्

फल देते हैं। अदीक्षित व्यक्ति इस तन्त्र का विचार (कर्म) करने पर कुष्ठरोगी होता है तथा शीघ्र मृत्यु को प्राप्त होता है; साथ ही नरकगामी भी होता है॥१९४-१९५॥

आर्जवे कुलसम्पन्ने शीलधर्मरते सदा ॥
दातव्यं सूर्यभक्ताय प्रज्ञावति जितेन्द्रिये ॥१९६॥

इति श्रीसाम्बपुराणे ग्रहादिदेवपूजनं नामैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः


सरल, सत् कुलोत्पन्न, सर्वदा धर्मरत, प्राज्ञ, जितेन्द्रिय सूर्यभक्त को ही यह विद्या प्रदान करनी चाहिये॥१९६॥

श्री साम्बपुराणोक्त ग्रहादि देवपूजा नामक इक्यावनवाँ अध्याय समाप्त