भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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पृष्ठ 313

त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

(पूजाविधिनिरूपणम्)

नारद उवाच

प्रथमं चिन्तयेत् पद्ममष्टपत्रं सकर्णिकम्।
तन्मध्ये चिन्तयेद्देवं भास्करं रश्मिविग्रहम् ॥१॥
सहस्रदिनसंस्कारं सूर्यकोटिसमप्रभम्।
महातेजोमयं ध्यात्वा आदित्यं पूजयेद् बुधः ॥२॥
योऽयं हरितवर्णाभं रथे तिष्ठति वाजिनम्।
अरुणः सारथिर्यस्य रथवाहः स्वयं स्थितः ॥३॥
तमहं लोकशांत्यर्थमादित्यमाह्वयाम्यहम्।
आयाहि भगवन्भानो तव यज्ञः प्रवर्त्तते ॥४॥

प्रथमतः कर्णिकायुक्त अष्टपत्र-विशिष्ट पद्म का चिन्तन करे। उसमें रश्मिस्वरूप सूर्यदेव का चिन्तन करना चाहिये। सहस्र दिनसंस्कारक (असंख्य दिनों को प्रकाशित करने वाले) कोटि सूर्य प्रभातुल्य महातेजोमय आदित्य का ध्यान करके पण्डितगण उनका पूजन करते हैं। जो हरित वर्ण वाले अश्वों के रथ पर स्थित हैं, रथ के सारथी अरुण जिस रथ पर हैं, लोक की शान्ति के लिये मैं उन आदित्य का आवाहन करता हूँ। हे भगवन् भानु! आप आईये। आपका यज्ञ प्रारम्भ होता है।।१-४।।

इदमर्घ्यं च पाद्यं च प्रतिगृह्य नमो नमः।
आह्वानं सहस्रकिरणं स्वागतं स्वागतं स्वागतं ठः ठः।
ॐ धर धर अद्य ॥५॥

यह अर्घ्य तथा पाद्य ग्रहण करिये। आपको नमस्कार है, नमस्कार है। सहस्रकिरणों से युक्त आपका मैं आह्वान करता हूँ। आपका स्वागत है (मूल में लिखित मन्त्र से पाद्य अर्घ्य प्रदान करे, यथा—इदमर्घ्यञ्च पाद्यं च प्रतिगृह्य नमो नमः (यह अर्घ्य तथा पाद्य मन्त्र है)। आवाहन मन्त्र है—आह्वानं······धर धर अद्य।।५।।

वनस्पतिरसो दिव्यो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः।
आघ्रेयः सर्वभूतानां प्रतिगृह्य नमो नमः ॥६॥

स्वाहा धूपः गन्ध गन्धादि ठः ठः गन्धः। ॐ दीपपञ्जलिनि ठं ठं दीपः।