भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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३०२ श्रीसाम्बपुराणम्

वनस्पतिरसो से लेकर नमः-पर्यन्त मूल श्लोक छः से धूप तथा दीप प्रदान करे। मन्त्रार्थ है—वनस्पति के निर्यास से उत्पन्न दिव्य गन्धयुक्त उत्तम गन्ध, जो समस्त प्राणियों के आघ्राण-योग्य है, उस धूप को ग्रहण करिये। आपको नमस्कार-नमस्कार। तदनन्तर स्वाहा कहे। तत्पश्चात् ‘धूपः गन्धगन्धादि स्वाहा' से गन्ध प्रदान करे और ‘दीपपञ्चलिनि स्वाहा' से दीपदान करे।।६।।

ॐ एतत्सुमनसं दिव्यं गन्ध्यादिः गन्धवत्तमम्।
आग्नेयः सर्वभूतानां प्रतिगृह्य नमो नमः ठः ठः ॥७॥ इति पुष्पम्

अब श्लोक ७ से पुष्पदान करे। जहाँ ‘ठः ठः' लिखा है, वहाँ ‘स्वाहा' कहे। मन्त्रार्थ है—इस दिव्य गन्धयुक्त गन्धश्रेष्ठ को, समस्त प्राणियों के आग्नेय पुष्प को ग्रहण करिये। आपको नमस्कार-नमस्कार।।७।।

ॐ ब्रह्मणा ग्रथितं पूर्वं पवित्रमिदमुत्तमम्।
यज्ञोपवीतं महातेज गृहीष्व नमोऽस्तु ते ॥८॥

मूल श्लोक ८ द्वारा यज्ञोपवीत दान करे। मन्त्रार्थ है—पहले ब्रह्मा द्वारा ग्रथित इस उत्तम महातेजयुक्त यज्ञोपवीत को ग्रहण करिये। हे हंस! आपको नमस्कार है।।८।।

सर्वौषधिसमृद्धस्तु भक्ष्योऽयं परमेश्वर।
अमृतं गृह्यतां देव अमृतोऽयं तवाशनः ॥९॥ इति अन्नम्।

श्लोक ९ द्वारा अन्नदान करना चाहिये। मन्त्रार्थ है—हे परमेश्वर! समस्त औषधियों (शस्य तथा वृक्ष-लतादि से उत्पन्न) के सहित यह खाद्य, यह अमृत आप ग्रहण करिये। हे देव! यह अमृत आपके लिये भक्षणीय है।।९।।

रत्नोज्ज्वलमिदं पुण्यं मुकुटं भूषणोत्तमम्।
मुकुटं गृह्यतां देव देवदेव नमो नमः ॥१०॥ इति मुकुटम्।

श्लोक १० द्वारा मुकुट-दान करे। मन्त्रार्थ है—रत्न के समान उज्ज्वल पुण्य मुकुट उत्तम भूषण है। हे देव! इसे आप ग्रहण करिये। हे देवदेव! आपको नमस्कार है, नमस्कार है।।१०।।

ॐ भास्कराय त्विदं वस्त्रं सर्ववस्त्रोत्तमं वरम्।
कटिभूषणमिदं पुण्यं दिव्यं देव नमोऽस्तु ते ॥११॥

इति श्रीसाम्बपुराणे पूजाविधिनिरूपणे प्रथमं पटलं नाम त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

श्लोक ११ द्वारा वस्त्रदान करना चाहिये। मन्त्रार्थ है—भास्कर को इन सभी वस्त्रों में से उत्तम वस्त्र अर्पित करता हूँ। इस दिव्य पुण्य कटिभूषण को आप ग्रहण करिये। हे देव! आपको नमस्कार है, नमस्कार है।।११।।

श्रीसाम्बपुराणोक्त पूजाविधि-निरूपण नामक तिरेपनवाँ अध्याय समाप्त