साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपञ्चमोऽध्यायः २५
तमेव चैव ते सर्वे विशन्त्यक्षयमव्ययम्। एतदभ्यधिकं तेषां यदैनं प्रविशन्ति ते॥३१॥
ऐसा जानकर मैं उन आत्मस्वरूप सनातन तत्त्व का पूजन करता हूँ। जो उनके भाव से सराबोर, भावित तथा तन्मय हैं एवं एकत्व से युक्त हैं, वे सभी इस अक्षय-अव्ययस्वरूप में प्रवृष्ट हैं। यह उनकी प्राप्ति है। वे उनमें ही प्रवेश करते हैं॥३०-३१॥
इति गुह्यसमुद्देशस्तव नारद कीर्त्तितः। अस्मद् भक्त्या तु देवर्षे त्वयापि परमं श्रुतम्॥३२॥
हे नारद! यह गोपनीय रहस्य तुमको मैंने बतलाया। हे देवर्षि! मेरी भक्ति के कारण तुमने भी इस परम तत्त्व को सुना॥३२॥
सुरैर्वा मुनिभिर्वापि पुराणं यैरिदं स्मृतम्। ते सर्वे परमात्मानं पूजयन्ति दिवाकरम्॥३३॥
देवगण अथवा मुनिगण जो इस पुराण का स्मरण करते हैं, वे सभी परमात्मा दिवाकर का पूजन करते हैं॥३३॥
इदमाख्यानमार्षेयं यन्मया कीर्त्तितं तव। न ह्यनादित्यभक्ताय त्वया देयं कथञ्चन॥३४॥
यह ऋषियों द्वारा कथित आख्यान है, जिसे मैंने तुमसे कहा। इसे आदित्यभक्त के अतिरिक्त किसी को भी नहीं बतलाना चाहिये॥३४॥
यश्चैतच्छावयेन्नित्यं यश्चैतत् शृणुयान्नरः। स सहस्रार्चिषं देवं प्रविशेन्नात्र संशयः॥३५॥
जो नित्य इसको सुनते हैं तथा सुनाते हैं, वे सहस्र किरणों वाले देवता सूर्य में प्रवेश करते हैं; यह निःसंदिग्ध है॥३५॥
मुच्येत्तार्त्तस्तथा रोगान्मुने श्रुत्वा कथामिमाम्। जिज्ञासुर्लभते ज्ञानं गतिमिष्टां तथैव च॥३६॥ क्षेमेन ब्रजतेऽध्वानमिदं यः पठते पथि। यो यं कामयते कामं स तं प्राप्नोत्यसंशयः॥३७॥
इसका श्रवण करके आर्त्त व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है, जिज्ञासु ज्ञानलाभ करता है और अभीप्सित गति को प्राप्त करता है। जो मार्ग में इसे पढ़ता है, वह निर्विघ्न अपने गन्तव्य तक पहुँच जाता है। इस प्रकार जो जिस कामना को करते हैं, वे उसे निःसंदेह प्राप्त कर लेते हैं॥३६-३७॥