भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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२६ | श्रीसाम्बपुराणम्

वशिष्ठ उवाच

एवमेतन्मयाख्यातं नारदेन महात्मना।
मयापि च तवाख्यातं भक्त्या भानोरिदं नृप ॥३८॥

ऋषि वशिष्ठदेव कहते हैं—महात्मा नारद ने मुझसे यह कहा था। हे राजन्! सूर्य की भक्ति के कारण मैंने इसे तुमसे कहा।।३८।।

त्वया तत् सततं राजन्नभ्यर्च्यो भगवान् रविः।
स हि धाता विधाता च सर्वस्य जगतो गुरुः ॥३९॥

इति श्रीसाम्बपुराणे मित्रवरुणयोस्तपोनाम पञ्चमोऽध्यायः

अतएव हे राजन्! तुम सर्वदा भगवान् सूर्य की अर्चना करो। वे ही धाता, विधाता तथा समस्त जगत् के गुरु हैं।।३९।।

श्री साम्ब पुराणान्तर्गत मित्र-वरुणतपस्या नामक पञ्चम अध्याय समाप्त