भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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३६८ | श्रीसाम्बपुराणम्

पकारादि चकारान्त पञ्जिका शक्ति है। शिवधात्री (शिव को धारण करने वाली) विश्व के तथा जगत्पति के मध्य में स्थित रहती है॥७॥

विशिष्टानि ततोऽन्यस्य बिन्दुना भूपतिः क्रमात्।
द्वे द्वे यथा पतत्वं वै चैशान्यां दिशि दक्षिणे ॥८॥

भूपतिक्रम से विन्दु द्वारा विशिष्ट समूह का विन्यास करके ईशान तथा दक्षिण में २-२ करके पातित करे॥८॥

अकारेकारभूताद्या रेफाद्याश्च ततः परम्।
एकाराद्ये तथा द्वे च शन्तर्योत्तरवर्मिकाः ॥९॥

इति श्रीसाम्बपुराणे बीजप्रसवे एकसप्ततितमोऽध्यायः

अकार, ईकार, भूतादि का, तदनन्तर रेफादि एवं एकाराद्य दो शन्तर्योत्तर (?) वर्म होगा॥९॥

श्रीसाम्बपुराण में बीजप्रसव नामक इकहत्तरवाँ अध्याय समाप्त