भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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३० श्रीसाम्बपुराणम्

दण्डिर्नग्नोऽग्रतस्तस्य दिक्षु चान्ये स्थिताः सुराः । एवं सर्वगतं नित्यं प्रदीप्तं जगतः शुभम् । ब्रह्माद्यैः संस्तुतं देवैरादित्यं शरणं व्रज ॥२३॥ इति श्रीसाम्बपुराणे भक्त्युपस्थानो नाम षष्ठोऽध्यायः


अन्य विविध नामों के देवगण उनकी परिचर्या कर रहे थे। उनमें पिङ्गल, देवक, दण्डनायक सूर्य के द्वारदेश पर विद्यमान थे। स्तोषनामक कल्माष पक्षीद्वय मेरुतुल्य व्योम के चार शृङ्गरूप थे। उनके सामने नग्न तथा दण्डि एवं चतुर्दिक अन्य देवता अवस्थित थे। इस प्रकार सर्वगत, नित्य, प्रदीप्त (उज्ज्वल), जगत् का शुभ करने वाले ब्रह्मादि देवताओं से संस्तुत आदित्य की शरण ग्रहण करो।।२१-२३।।

श्रीसाम्बपुराण का भक्त्युपस्थान नामक षष्ठ अध्याय समाप्त