साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
DevanagariHindipublished424 पृष्ठ
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चतुरशीतितमोऽध्यायः ४०५
भुक्त्वा तु सकलान् भोगान् सूर्यलोके महीयते।
अष्टादशपुराणानां श्रवणे यत्फलं लभेत्।
तत्फलं समवाप्नोति सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ॥१५॥
इति श्रीसाम्बपुराणे वशिष्ठबृहद्बलसंवादे
फलश्रुतिर्नाम चतुरशीतितमोऽध्यायः
इस संसार में समस्त भोगों का उपभोग करके वे सूर्यलोक में पूजित होते हैं। १८ पुराणों के सुनने से जो फल मिलता है, वह सब इसके पाठ से मिलता है; तुमसे यह सत्य-सत्य कहता हूँ॥१५॥
श्री साम्ब पुराणोक्त वशिष्ठ-बृहद्दल संवाद में फलश्रुति
नामक चौरासीवाँ अध्याय समाप्त
शुभं भवतु
॥ समाप्तोऽयं ग्रन्थः ॥