साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअष्टमोऽध्यायः
(सूर्यनिगमनम्)
नारद उवाच
आदित्यमूलमखिलं त्रैलोक्यं यदुनन्दन।
भवत्यस्माज्जगत् सर्वं सदेवासुरमानुषम् ॥१॥
रुद्रोपेन्द्रमहेन्द्राणां विप्रेन्द्रत्रिदिवौकसाम्।
महाद्युतिमतां चैव तेजो यत् सार्वलौकिकम् ॥२॥
नारद कहते हैं—हे यदुनन्दन (जाम्बवतीसुत साम्ब)! समस्त त्रिभुवन के मूल आदित्य हैं। देवता, असुर तथा मनुष्य के साथ समस्त जगत् सूर्य से ही उत्पन्न है। रुद्र, उपेन्द्र, महेन्द्र, ब्राह्मणश्रेष्ठ, स्वर्गवासी देवगण एवं महाद्युति-सम्पन्न सबका जो सार्वलौकिक तेज है, वह सूर्य से ही उत्पन्न है॥१-२॥
सर्वात्मा सर्वलोकेशो देवदेवः प्रजापतिः ॥३॥
वे सर्वात्मा, समस्त लोक के ईश्वर, देवताओं के देवता तथा प्रजागण के पालक प्रजापति हैं॥३॥
सूर्य एव त्रिलोकस्य मूलं परमदैवतम्।
अग्नौ क्षिप्त्वाऽहुतिः सम्यगादित्यमुपतिष्ठते।
आदित्याज्जायते वृष्टिर्वृष्टेरन्नं ततः प्रजा ॥४॥
सूर्य त्रिलोक के मूल (प्रधान) परम दैवत हैं। अग्नि में प्रक्षिप्त आहुति सम्यक् रूपेण आदित्य को मिलती है। आदित्य से वृष्टि का उदय होता है। वृष्टि से अन्न तथा अन्न से प्रजागण उत्पन्न होते हैं॥४॥
सूर्यात् प्रसूयते सर्वं तत्र चैव प्रलीयते।
भावाभावौ हि लोकानामादित्यान्निःसृतौ पुरा ॥५॥
सततं ध्यायिनो ध्यानं मोक्षश्चाप्येष मोक्षिणाम्।
अत्र गच्छन्ति निर्वाणं जायन्तेऽस्मात् पुनः प्रजाः ॥६॥
सूर्य से ही सब कुछ उत्पन्न होता है और अन्त में वहीं विलीन हो जाता है। समस्त लोक की उत्पत्ति तथा विनाश आदित्य से ही होता है। इनका निरन्तर ध्यान से ध्यानकारीगण ध्यान तथा मोक्षाकांक्षीगण (सूर्य में) मोक्ष प्राप्त करते हैं। इसी से सबका निर्वाण होता है एवं पुनः सूर्य से ही प्रजागण उत्पन्न होते हैं॥५-६॥